Top Newsदेश

संसद की गृह मामलों की कमेटी में हंगामा, पैलेट गन और जंतर-मंतर लाठीचार्ज पर चर्चा की मांग से गरमाया माहौल

नई दिल्ली। संसद की गृह मामलों की स्थायी समिति की बैठक में मंगलवार को पैलेट गन के कथित इस्तेमाल और जंतर-मंतर पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर हंगामा हो गया। विपक्षी सदस्यों ने बैठक में इन मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग की। सूत्रों के मुताबिक समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद राधामोहन दास ने चर्चा की मांग को स्वीकार नहीं किया, जिसके बाद बैठक में माहौल गरमा गया।

पैलेट गन के मामले पर चर्चा की मांग

विपक्षी सदस्यों ने दिल्ली में छात्र आंदोलनों के दौरान कथित पैलेट गन के इस्तेमाल से प्रभावित साहिल के मामले को समिति के सामने उठाने की मांग की। इसके साथ ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से किए गए कथित लाठीचार्ज पर भी चर्चा की मांग की गई।

साहिल के मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली के संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर धरना दिया था। बताया गया कि करीब पांच घंटे तक धरने के बाद पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।

राहुल गांधी ने कार्रवाई के आदेश पर उठाए सवाल

राहुल गांधी ने दावा किया था कि साहिल के शरीर में 200 से ज्यादा छर्रे लगे हैं और उसकी आंख में भी तीन छर्रे लगे हैं। उन्होंने कहा था कि मामले की जांच अपनी जगह जारी रहनी चाहिए, लेकिन यह भी पता लगाया जाना जरूरी है कि कथित तौर पर कील लगी लाठियों के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया।

राहुल गांधी ने सवाल उठाया था कि क्या इस कार्रवाई का आदेश केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिया था या किसी अन्य स्तर से यह निर्देश आया था। उन्होंने कहा था कि यदि ऐसा आदेश गृह मंत्री की ओर से दिया गया था तो छात्रों पर हुए कथित हमले की जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।

-------------------------------------------------------------------------------------------

जंतर-मंतर की कार्रवाई पर भी उठे सवाल

विपक्षी सदस्यों ने जंतर-मंतर समेत देश के दूसरे हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और पुलिस तथा सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर भी चर्चा की मांग की। उनका कहना था कि ऐसे मामलों में कार्रवाई की परिस्थितियों और जिम्मेदारी से जुड़े पहलुओं की जांच जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने गठित की पांच सदस्यीय कमेटी

जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा तथा पुलिस और सुरक्षा बलों की कार्रवाई की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट पहले ही पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन कर चुका है। अदालत को उम्मीद है कि समिति की रिपोर्ट मामले में आगे के फैसले के लिए महत्वपूर्ण सहायता देगी।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी को इस समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। समिति को विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई घटनाओं और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से जुड़े पहलुओं की जांच करनी है।

 

---------------------------------------------------------------------------------------------------