नेपाल का बदला रुख, अब भारत-चीन समेत 4 देशों से मांगी मदद; बाढ़ में 626 मौतें, 2500 लोग अब भी लापता
नई दिल्ली: नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद विदेशी खोज और बचाव टीमों की मदद नहीं लेने के फैसले पर सरकार ने अब यू-टर्न लिया है। अंतरराष्ट्रीय दबाव और बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों के लापता होने के बीच नेपाल ने सीमित क्षेत्रों में विदेशी विशेषज्ञों की मदद लेने की मंजूरी दे दी है। भारत की तकनीकी टीम काठमांडू पहुंच चुकी है और भारतीय वायुसेना भी राहत एवं बचाव अभियान में जुटी है। भारत की ओर से दवाइयों, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सामान समेत 10 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी गई है।
नेपाल सरकार ने 26 जून को कहा था कि उसके अपने बचाव दल खोज अभियान संभालने में सक्षम हैं और विदेशी खोज एवं बचाव टीमों को अनुमति नहीं दी जाएगी। अब सरकार ने अपना रुख बदलते हुए डीएनए जांच, फॉरेंसिक जांच और विशेष बचाव अभियानों के लिए सीमित अंतरराष्ट्रीय सहायता स्वीकार करने का फैसला किया है।

भारत, चीन समेत चार देशों की विशेषज्ञ टीमों को मंजूरी
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन केंद्र के आकलन के आधार पर नेपाल की सरकार ने भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञों और तकनीकी दलों को काठमांडू आने की मंजूरी दी है। इन टीमों के पास सुरंग से बचाव, डीएनए जांच और फॉरेंसिक जांच का अनुभव है। चारों देशों के विशेषज्ञों को विशेष रूप से रसुवा और नुवाकोट जिलों में प्रभावित पनबिजली परियोजनाओं की सुरंगों में बचाव कार्य के लिए अनुमति दी जाएगी।
नेपाल में बाढ़ के कारण 14 पनबिजली परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। इनमें आठ परियोजनाएं रसुवा और छह नुवाकोट जिले में हैं। सरकार का कहना है कि विदेशी सहायता उन तकनीकी क्षेत्रों तक सीमित रहेगी, जहां विशेषज्ञता की जरूरत है।
विदेशी नागरिकों के लापता होने से बढ़ा दबाव
नेपाल के इस फैसले के पीछे विदेशी नागरिकों के लापता होने का मामला भी बड़ी वजह माना जा रहा है। काठमांडू में कुछ देशों के राजनयिक अधिकारियों ने अपनी खोज और बचाव टीमों को नेपाल भेजने की अनुमति मांगी थी। अधिकारियों के अनुसार, कई विदेशी नागरिकों के बारे में कई दिनों तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई, जिससे संबंधित देशों की चिंता बढ़ती गई।
भारत समेत कई देशों ने पहले ही नेपाल को खोज एवं बचाव अभियान में मदद की पेशकश की थी। भारत ने सुरंग बचाव दल, चिकित्सा दल और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीम भेजने की पेशकश की थी। दक्षिण कोरिया ने भी अतिरिक्त सहायता देने की इच्छा जताई थी। दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने नेपाली विदेश मंत्री खनाल से बातचीत कर नेपाल में मौजूद अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। इनमें नौ लोग ऐसे बताए गए हैं, जिनसे संपर्क नहीं हो पाया है।
भारत ने राहत सामग्री के साथ बढ़ाया मदद का हाथ
भारत की ओर से राहत एवं बचाव प्रयासों के तहत तकनीकी दल नेपाल पहुंच चुका है। भारतीय वायुसेना का सी-130 विमान 10 टन जरूरी राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंचा। इसमें दवाइयों और खाद्य सामग्री समेत आपदा प्रभावित लोगों के लिए आवश्यक सामान शामिल है।
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नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के अनुसार, देश को उन तकनीकी क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहायता की जरूरत है, जहां विशेषज्ञता की कमी है। हालांकि, उन्होंने खोज और बचाव के सामान्य अभियानों के लिए विदेशी सहायता की जरूरत से इनकार किया था।
बाढ़ में 626 मौतें, करीब 2500 लोग लापता
नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों के किनारे बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ और इससे जुड़ी घटनाओं में मृतकों की संख्या 626 तक पहुंच गई है, जबकि करीब 2500 लोगों के लापता होने की बात सामने आई है। बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। करीब 320 भारतीयों समेत भारतीय मूल के 100 लोगों से संपर्क नहीं हो पाने की जानकारी दी गई है। वहीं तिब्बत में मौजूद करीब 400 भारतीयों से संपर्क स्थापित हो चुका है और उनके सुरक्षित होने की जानकारी है।
बाढ़ के बाद नदियों में बहकर आए शवों की बरामदगी का सिलसिला भी जारी है। रसुवा की भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के बाद नवलपरासी जिले में नारायणी नदी के अलग-अलग स्थानों से शुक्रवार शाम तक 158 शव बरामद किए गए। इसके बाद 48 और शव मिलने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, बरामद शवों को विभिन्न अस्पतालों और वन कार्यालय के भवनों में सुरक्षित रखा गया है, जबकि नौ शव अभी नदी किनारे हैं और उन्हें सुरक्षित स्थान पर लाने की तैयारी की जा रही है।
विदेशी मदद को लेकर नेपाल ने अपनाई सीमित नीति
नेपाल सरकार ने अब स्पष्ट किया है कि विदेशी विशेषज्ञों की मदद जरूरत के मुताबिक और सीमित क्षेत्रों में ली जाएगी। रसुवा और नुवाकोट की पनबिजली परियोजनाओं की सुरंगों में बचाव, डीएनए जांच और फॉरेंसिक जांच को प्राथमिकता दी गई है। भीषण बाढ़ के बाद लगातार बढ़ रहे मौत और लापता लोगों के आंकड़ों के बीच सरकार के इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के लिए राहत एवं बचाव कार्य में शामिल होने का रास्ता खुल गया है।

