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युवाओं में अचानक मौत का खतरा क्यों बढ़ता है? 25 अस्पतालों की स्टडी में सामने आए दिल और खून के थक्के से जुड़े बड़े जोखिम

नई दिल्ली: जिम में कसरत करते समय या डांस के दौरान किसी युवा की अचानक मौत की खबर अक्सर लोगों को हैरान कर देती है। बाहर से पूरी तरह फिट दिखने वाले व्यक्ति के साथ ऐसा क्यों होता है, इस सवाल पर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के एक अध्ययन ने कई अहम संकेत दिए हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार कम उम्र में दिल का दौरा पड़ने और रक्त के थक्के बनने के पीछे पहले थक्का बनने का इतिहास, परिवार में ऐसी समस्या, अन्य बीमारियां और धूम्रपान जैसे कई जोखिम कारक जिम्मेदार हो सकते हैं।

यह अध्ययन आईसीएमआर के राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान के शोधकर्ताओं ने देश के 25 बड़े अस्पतालों में किया। इसमें 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के 767 मरीजों को शामिल किया गया। खास बात यह रही कि अध्ययन में उन मरीजों को देखा गया, जिन्हें समय पर इलाज मिलने के बाद बचा लिया गया था। इसका उद्देश्य अपेक्षाकृत कम उम्र में दिल का दौरा पड़ने या शरीर में रक्त के थक्के बनने के पीछे भूमिका निभाने वाले कारकों को समझना था।

पहले रक्त का थक्का बनने वालों में खतरा करीब 60 गुना तक अधिक

अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों को पहले भी रक्त का थक्का बनने की समस्या हो चुकी थी, उनमें दिल का दौरा पड़ने का जोखिम काफी अधिक था। ऐसे लोगों में यह खतरा करीब 60 गुना तक ज्यादा देखा गया।

वहीं, जिन मरीजों को पहले से कोई दूसरी बीमारी थी, उनमें दिल के दौरे का जोखिम 4.6 गुना अधिक पाया गया। इससे यह संकेत मिलता है कि पहले से मौजूद स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं कम उम्र में भी हृदय से जुड़े गंभीर जोखिम बढ़ा सकती हैं।

धूम्रपान और पारिवारिक इतिहास भी बने बड़े जोखिम

शोध में धूम्रपान करने वालों के लिए भी गंभीर चेतावनी सामने आई। ऐसे लोगों में दिल का दौरा पड़ने का खतरा 3.5 गुना अधिक पाया गया।

इसके अलावा, जिन लोगों के परिवार में पहले किसी सदस्य को रक्त का थक्का बनने की समस्या रही थी, उनमें भी सामान्य लोगों की तुलना में दिल के दौरे का जोखिम करीब 3.3 गुना ज्यादा पाया गया।

कोविड संक्रमण पर भी अध्ययन में सामने आई अहम जानकारी

अध्ययन में कोविड से जुड़ी जानकारी भी सामने आई। जिन लोगों को कोविड संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था, उनमें रक्त का थक्का बनने की समस्या देखी गई। हालांकि अध्ययन के अनुसार कोविड वैक्सीन से लोगों को इस तरह का नुकसान होने का प्रमाण नहीं मिला।

767 मरीजों में कितनों को पड़ा दिल का दौरा?

अध्ययन में शामिल कुल 767 मरीजों में से 432, यानी करीब 56.3 प्रतिशत लोगों को दिल का दौरा पड़ा था। वहीं 198, यानी करीब 25.8 प्रतिशत मरीजों में दिमाग की नस में रक्त का प्रवाह रुकने से जुड़ी समस्या सामने आई।

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दोनों तरह के मामलों को मिलाकर यह संख्या अध्ययन में शामिल मरीजों के बड़े हिस्से से संबंधित रही।

31 से 45 साल के लोगों की संख्या सबसे ज्यादा

उम्र के लिहाज से भी यह अध्ययन महत्वपूर्ण है। कुल 767 मरीजों में 614, यानी करीब 80.1 प्रतिशत की उम्र 31 से 45 वर्ष के बीच थी।

इससे यह साफ होता है कि इस तरह के जोखिम केवल अधिक उम्र के लोगों तक सीमित नहीं हैं। युवाओं में भी यदि पहले से कोई जोखिम मौजूद है तो उसे नजरअंदाज करना गंभीर साबित हो सकता है।

क्या जिम या डांस करना खतरनाक है?

विशेषज्ञों के मुताबिक इस अध्ययन का यह मतलब नहीं है कि जिम जाना या डांस करना अपने आप में खतरनाक है। नियमित शारीरिक गतिविधि सामान्य तौर पर स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती है।

हालांकि जिन लोगों में पहले से हृदय संबंधी जोखिम या रक्त के थक्के बनने से जुड़ी समस्या का इतिहास है, उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

शरीर के संकेतों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

अध्ययन से यह अहम संदेश मिलता है कि अचानक होने वाली गंभीर घटनाओं के पीछे कई बार पहले से मौजूद जोखिम छिपे हो सकते हैं। इसलिए शरीर से मिलने वाले संकेतों को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते जांच और चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

खासकर धूम्रपान करने वाले लोगों और उन लोगों को, जिनके परिवार में रक्त का थक्का बनने जैसी बीमारी का इतिहास रहा है, अपनी सेहत को लेकर अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

 

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