रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग में उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया अभियन्ता दिवस

बरेली,16 सितम्बर। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग में अभियन्ता दिवस अत्यंत उत्साह, उमंग और रचनात्मक वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को अभियन्ता दिवस के ऐतिहासिक महत्व से परिचित कराने के साथ-साथ उनकी तकनीकी प्रतिभा, नवाचार क्षमता, तार्किक सोच, संचार कौशल और सांस्कृतिक अभिरुचियों को प्रोत्साहित करना था।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों के लिए अनेक तकनीकी, रचनात्मक और सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इनमें टेक रंगोली, तकनीकी सेमिनार, ‘एक्सप्लेन लाइक एन इंजीनियर’, ‘फ्रॉम वर्ड टू एप्लीकेशन’, काव्य-पाठ, गायन, हार्डवेयर मॉडल प्रदर्शन तथा नवाचार प्रतियोगिता प्रमुख रहीं। इन गतिविधियों में विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया और अपनी कल्पनाशीलता, तकनीकी समझ तथा प्रस्तुतीकरण क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
टेक रंगोली प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने रंगों के माध्यम से विज्ञान, इलेक्ट्रॉनिक्स, संचार प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास से संबंधित विषयों को आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया।
तकनीकी सेमिनार प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने आधुनिक एवं उभरती हुई प्रौद्योगिकियों से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
‘एक्सप्लेन लाइक एन इंजीनियर’ प्रतियोगिता के अंतर्गत विद्यार्थियों ने विभिन्न तकनीकी सिद्धांतों, उपकरणों और प्रणालियों की कार्यप्रणाली को सरल भाषा में समझाया। इस गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि एक अच्छे अभियंता के लिए किसी तकनीकी विषय को समझना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे सामान्य व्यक्ति तक स्पष्ट और प्रभावशाली तरीके से पहुँचाने की क्षमता भी आवश्यक है।
‘फ्रॉम वर्ड टू एप्लीकेशन’ गतिविधि में विद्यार्थियों ने तकनीकी शब्दों एवं अवधारणाओं को उनके वास्तविक जीवन में उपयोग से जोड़कर प्रस्तुत किया। प्रतिभागियों ने दैनिक जीवन, उद्योग, संचार, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, कृषि और पर्यावरण से संबंधित समस्याओं के समाधान में इंजीनियरिंग के योगदान को विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से समझाया। इस गतिविधि ने विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान को व्यावहारिक उपयोग में परिवर्तित करने के लिए प्रेरित किया।
हार्डवेयर एवं नवाचार प्रतियोगिता कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रही। विद्यार्थियों ने विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक परिपथों, हार्डवेयर मॉडलों, नवीन तकनीकी विचारों और समाजोपयोगी परियोजनाओं का प्रदर्शन किया। इन प्रस्तुतियों में विद्यार्थियों की समस्या-समाधान क्षमता, रचनात्मक सोच और तकनीकी कौशल स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को इन विचारों को आगे विकसित कर उपयोगी प्रोटोटाइप एवं शोध परियोजनाओं में परिवर्तित करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम को रोचक और बहुआयामी बनाने के लिए काव्य-पाठ एवं गायन प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की गईं। विद्यार्थियों ने कविता और संगीत के माध्यम से राष्ट्र निर्माण, विज्ञान, तकनीकी प्रगति, अभियंताओं के योगदान और मानवीय मूल्यों से जुड़े संदेश प्रस्तुत किए। इन गतिविधियों ने यह दर्शाया कि इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों में तकनीकी योग्यता के साथ-साथ साहित्यिक, कलात्मक और सांस्कृतिक प्रतिभा भी विद्यमान है।
विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष राय ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि अभियंता किसी भी राष्ट्र के आर्थिक, औद्योगिक, वैज्ञानिक और सामाजिक विकास की रीढ़ होते हैं। सड़क, भवन, ऊर्जा, संचार, स्वास्थ्य सेवाओं, परिवहन, अंतरिक्ष विज्ञान, डिजिटल तकनीक और राष्ट्रीय सुरक्षा सहित जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में अभियंताओं की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल रोजगार प्राप्त करने के उद्देश्य से शिक्षा ग्रहण न करें, बल्कि अपने ज्ञान, कौशल और नवाचार का उपयोग समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए करें।
-------------------------------------------------------------------------------------------
शिक्षकों ने विद्यार्थियों को महान अभियंता एवं भारत रत्न सर मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के जीवन और राष्ट्र निर्माण में उनके उल्लेखनीय योगदान से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि अभियंता दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि प्रत्येक भावी अभियंता के लिए अपने दायित्वों, कार्यशैली और सामाजिक योगदान पर विचार करने का अवसर भी है।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को तकनीक के जिम्मेदारीपूर्ण एवं नैतिक उपयोग का विशेष संदेश दिया गया। शिक्षकों ने कहा कि तकनीकी प्रगति तभी सार्थक है, जब उसका प्रयोग मानव कल्याण, सामाजिक समानता, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए किया जाए। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, इंटरनेट, स्वचालन, रोबोटिक्स और डिजिटल संचार जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते समय गोपनीयता, सुरक्षा, पारदर्शिता, निष्पक्षता और मानवीय मूल्यों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है।
विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए शिक्षकों ने कहा कि एक उत्कृष्ट अभियंता केवल मशीनों और प्रणालियों का निर्माण नहीं करता, बल्कि वह अपने ज्ञान से लोगों के जीवन को बेहतर बनाता है। इसलिए तकनीकी दक्षता के साथ ईमानदारी, अनुशासन, संवेदनशीलता, टीम भावना, सामाजिक उत्तरदायित्व और पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी प्रत्येक अभियंता के व्यक्तित्व का अभिन्न अंग होनी चाहिए।
कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष राय, डॉ. हरि कुमार सिंह, डॉ. छवि शर्मा, डॉ. जनक कपूर, डॉ. सुमित श्रीवास्तव तथा डॉ. इंदरप्रीत कौर की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी शिक्षकों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया तथा उन्हें अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता और समाजोपयोगी तकनीकों के विकास की दिशा में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
शिक्षकों ने विद्यार्थियों से नियमित रूप से तकनीकी गतिविधियों, परियोजनाओं, सेमिनारों और नवाचार प्रतियोगिताओं में सहभागिता करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, समूह में कार्य करने की भावना, प्रभावी संचार कौशल और व्यावहारिक ज्ञान का विकास करती हैं।
अभियन्ता दिवस का यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और मनोरंजक सिद्ध हुआ। कार्यक्रम ने उन्हें यह समझने का अवसर दिया कि इंजीनियरिंग केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के प्रति एक महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी है। विभिन्न प्रतियोगिताओं और गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में तकनीकी सोच, रचनात्मकता, नवाचार, नैतिक मूल्यों एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को प्रोत्साहन मिला। समारोह का समापन विद्यार्थियों को एक जिम्मेदार, संवेदनशील और नवाचारपूर्ण अभियन्ता बनकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के संकल्प के साथ हुआ।
बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

