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रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.के.पी.सिंह की अध्यक्षता में ‘आदर्श अंगूर उद्यान’ का भव्य उद्घाटन।एडीजी डॉ. रमित शर्मा ने किया शुभारंभ

बरेली,30 अगस्त। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली में कृषि एवं उद्यानिकी के क्षेत्र में एक नई और अभिनव पहल का शुभारंभ करते हुए ‘आदर्श अंगूर उद्यान’ का उद्घाटन किया गया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित भव्य कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. के.पी. सिंह ने की, जबकि एडीजी पुलिस, बरेली जोन डॉ. रमित शर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में ‘आदर्श अंगूर उद्यान’ का शुभारंभ किया।

उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. रमित शर्मा एवं कुलपति प्रो. के.पी. सिंह ने अंगूर की बेलों का पौधारोपण कर इस महत्वाकांक्षी कृषि एवं उद्यानिकी परियोजना की औपचारिक शुरुआत की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

कुलपति प्रो. के.पी. सिंह ने कहा कि ‘आदर्श अंगूर उद्यान’ विश्वविद्यालय की कृषि, उद्यानिकी, अनुसंधान, नवाचार एवं कौशल विकास को बढ़ावा देने वाली महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालय परिसर को हरित एवं आकर्षक बनाने के साथ-साथ विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अंगूर की वैज्ञानिक एवं आधुनिक खेती का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है।

उन्होंने कहा कि इस उद्यान को भविष्य में एक मॉडल डेमोन्स्ट्रेशन एवं रिसर्च सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां अंगूर की खेती से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें बेलों की ट्रेनिंग एवं प्रूनिंग, माइक्रो-इरिगेशन, फर्टिगेशन, पोषण प्रबंधन, रोग एवं कीट प्रबंधन तथा गुणवत्तापूर्ण फल उत्पादन जैसी तकनीकों पर व्यावहारिक कार्य किया जाएगा।

कुलपति ने बताया कि उद्यान को अंतरराष्ट्रीय स्तर की रोपण सामग्री से समृद्ध करने के लिए स्पेन एवं इटली से उन्नत एवं उच्च गुणवत्ता वाली अंगूर की किस्मों का आयात किया जाएगा। इन किस्मों को बरेली की कृषि-जलवायु परिस्थितियों में विकसित कर उनकी अनुकूलता, उत्पादन क्षमता, फल गुणवत्ता एवं व्यावसायिक संभावनाओं का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि बरेली क्षेत्र में अंगूर उत्पादन की अपार संभावनाओं को देखते हुए यह पहल विशेष महत्व रखती है। क्षेत्र को अंगूर उत्पादन के संभावित क्लस्टर के रूप में विकसित करने की दिशा में चल रहे प्रयासों के साथ विश्वविद्यालय का यह उद्यान किसानों, कृषि विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं कृषि उद्यमियों के लिए एक महत्वपूर्ण मॉडल बन सकता है।

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प्रो. उपेंद्र कुमार ने कहा कि ‘आदर्श अंगूर उद्यान’ का उद्देश्य केवल अंगूर की बेलों का रोपण करना नहीं, बल्कि इसे ‘फील्ड लैबोरेटरी’ के रूप में विकसित करना है, जहां विद्यार्थी और शोधार्थी अंगूर उत्पादन की पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से समझ सकेंगे। भविष्य में यहां अंगूर उत्पादन, फल गुणवत्ता, जल एवं पोषक तत्व प्रबंधन, मूल्य संवर्धन तथा कृषि-आधारित उद्यमिता से संबंधित शोध एवं प्रशिक्षण गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा सकता है।

मुख्य अतिथि एडीजी डॉ. रमित शर्मा ने विश्वविद्यालय की इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा संस्थानों में कृषि एवं पर्यावरण आधारित ऐसे प्रकल्प विद्यार्थियों को प्रकृति और सतत विकास से जोड़ने के साथ-साथ समाज को भी सकारात्मक संदेश देते हैं। उन्होंने कहा कि ‘आदर्श अंगूर उद्यान’ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए व्यावहारिक ज्ञान एवं नवाचार का जीवंत केंद्र बन सकता है।

उद्घाटन समारोह के दौरान विश्वविद्यालय परिसर को हरित, स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल बनाने तथा लगाए गए पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प भी लिया गया।

‘आदर्श अंगूर उद्यान’ का यह उद्घाटन महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के लिए कृषि एवं उद्यानिकी के क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत है। अंतरराष्ट्रीय अंगूर किस्मों, आधुनिक उत्पादन तकनीकों, वैज्ञानिक अनुसंधान एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण के समन्वय से यह उद्यान आने वाले समय में बरेली एवं रुहेलखंड क्षेत्र में आधुनिक अंगूर उत्पादन की संभावनाओं का मॉडल केंद्र बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

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