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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उ.प्र., एमजेपी रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय के डॉ. दीपक गंगवार की 5G-6G एंटीना परियोजना को दी स्वीकृति

बरेली, 01सितम्बर। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली के लिए अनुसंधान एवं नवाचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त हुई है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, उत्तर प्रदेश द्वारा विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इंस्ट्रुमेंटेशन इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. दीपक गंगवार, अनुप्रयुक्त गणित विभाग के प्रो. एम. एल. गंगवार एवं इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की डॉ. इंदरप्रीत कौर की शोध परियोजना “Design and Development of Metasurface Based Multibeam Antenna for 5G Applications” को स्वीकृति प्रदान की गई है। यह परियोजना 5G संचार प्रणालियों के लिए अत्याधुनिक मेटासर्फेस आधारित मल्टीबीम एंटीना के विकास पर केंद्रित है। परियोजना के माध्यम से ऐसी स्वदेशी एंटीना तकनीक विकसित की जाएगी, जो एक साथ अनेक दिशाओं में उच्च दक्षता के साथ सिग्नलों का प्रसारण एवं ग्रहण कर सकेगी। इससे 5G नेटवर्क की क्षमता, कवरेज, स्पेक्ट्रम दक्षता तथा डेटा संचार की गति में उल्लेखनीय सुधार होने की संभावना है।

परियोजना के प्रमुख अन्वेषक (Principal Investigator) डॉ. दीपक गंगवार हैं, जबकि सह-अन्वेषक के रूप में प्रो. एम. एल. गंगवार एवं डॉ. इंदरप्रीत कौर शोध कार्य में सहयोग प्रदान करेंगे।
तीन वर्षीय अवधि की इस परियोजना के अंतर्गत उन्नत मेटासर्फेस तकनीक, फेज ग्रेडिएंट संरचनाओं तथा आधुनिक माइक्रोवेव इंजीनियरिंग सिद्धांतों का उपयोग करते हुए उच्च प्रदर्शन क्षमता वाले मल्टीबीम एंटीना का डिजाइन, सिमुलेशन, निर्माण एवं परीक्षण किया जाएगा। परियोजना के लिए लगभग ₹17.58 लाख के अनुसंधान अनुदान का प्रावधान किया गया है।

डॉ. गंगवार ने बताया कि भविष्य की 5G एवं 6G संचार प्रणालियों में उच्च डेटा दर, कम विलंबता तथा बेहतर नेटवर्क कवरेज सुनिश्चित करने के लिए उन्नत एंटीना तकनीकों की आवश्यकता है। प्रस्तावित मेटासर्फेस आधारित मल्टीबीम एंटीना इन चुनौतियों का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करेगा तथा देश में स्वदेशी दूरसंचार तकनीकों के विकास को नई दिशा देगा।

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परियोजना के सफल क्रियान्वयन से वायरलेस संचार, स्मार्ट सिटी, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), रक्षा संचार, उपग्रह संचार तथा अगली पीढ़ी की मोबाइल संचार प्रणालियों के लिए उपयोगी तकनीकी समाधान विकसित होने की अपेक्षा है। साथ ही, विश्वविद्यालय के शोधार्थियों, स्नातकोत्तर एवं स्नातक विद्यार्थियों को अत्याधुनिक अनुसंधान एवं प्रोटोटाइप विकास में सहभागिता का अवसर प्राप्त होगा।

विश्वविद्यालय के कुलपति एवं प्रशासन ने इस उपलब्धि पर डॉ. दीपक गंगवार, प्रो. एम. एल. गंगवार एवं डॉ. इंदरप्रीत कौर को बधाई देते हुए इसे संस्थान की अनुसंधान क्षमता, वैज्ञानिक उत्कृष्टता तथा नवाचार संस्कृति का प्रतीक बताया है। विश्वविद्यालय ने विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना राष्ट्रीय स्तर पर एमजेपी रोहिलखंड विश्वविद्यालय की वैज्ञानिक पहचान को और सुदृढ़ करेगी तथा “आत्मनिर्भर भारत” के लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

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