80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल बंधेज पगड़ी में नजर आए PM मोदी, लाल किले से दिया खास संदेश
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में अपनी खास पगड़ी वाली परंपरा को आगे बढ़ाया। लाल किले पर पहुंचे पीएम मोदी चमकदार लाल रंग की पगड़ी में नजर आए, जिस पर पीले और सफेद रंग का बांधनी पैटर्न था। उन्होंने सफेद कुर्ता-पायजामा के साथ भूरे रंग की नेहरू जैकेट पहनी थी और लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया।
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अलग-अलग अंदाज की पगड़ी पहनना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पहचानी जाने वाली परंपरा बन चुकी है। इस बार भी उनकी पगड़ी के रंग और डिजाइन ने लोगों का ध्यान खींचा।

हर साल दिखा अलग अंदाज
प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2014 में लाल किले से अपने पहले स्वतंत्रता दिवस संबोधन के दौरान लाल रंग की चमकदार जोधपुरी बंधेज पगड़ी पहनी थी। इसके अगले साल वह पीले और कई रंगों वाले क्रॉस-क्रॉस पैटर्न की पगड़ी में नजर आए थे।
इसके बाद अलग-अलग वर्षों में प्रधानमंत्री गुलाबी, लाल, केसरिया, बांधनी और लहरिया शैली की पगड़ियों में दिखाई दिए। एक अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज के रंगों से प्रेरित पगड़ी भी पहनी थी।
12 साल, 12 अलग अंदाज
वर्ष 2014 से अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अलग-अलग समारोहों में कई तरह की पगड़ियां पहनी हैं। इन सभी को एक साथ देखने पर उनके रंगों और डिजाइनों में एक खास पैटर्न दिखाई देता है।
इनमें कई पगड़ियां राजस्थान और पश्चिमी भारत की पारंपरिक कपड़ा शैलियों से प्रेरित रही हैं। इनके रंगों में अक्सर केसरिया, लाल और पीले रंग प्रमुखता से दिखाई देते हैं।
पगड़ी के चयन को लेकर क्या कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक

राजनीतिक विश्लेषक सज्जन कुमार के मुताबिक, प्रधानमंत्री जैसे नेता जब किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होते हैं तो उनकी वेशभूषा भी सोच-समझकर चुनी जाती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री अपने संदेश को लेकर काफी सतर्क रहते हैं।
कुमार के मुताबिक, स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री की पगड़ियों में धार्मिक या किसी खास सामाजिक पहचान को प्रमुखता देने के बजाय पारंपरिक और औपचारिक शैली पर जोर दिखाई देता है।
पगड़ी और साफे के पीछे की कहानी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई मौकों पर सिख पगड़ी भी पहन चुके हैं, लेकिन स्वतंत्रता दिवस पर उन्होंने आम तौर पर ऐसी शैली की पगड़ी से दूरी रखी है, जिसकी स्पष्ट धार्मिक पहचान हो। उनकी स्वतंत्रता दिवस वाली पगड़ियां हरियाणा और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में किसानों द्वारा पहने जाने वाले साफे जैसी भी नहीं रही हैं।
सज्जन कुमार के अनुसार, प्रधानमंत्री की स्वतंत्रता दिवस वाली पगड़ियों में राजस्थान और गुजरात से जुड़ी ऐतिहासिक भव्यता और औपचारिक शैली की झलक अधिक दिखाई देती है। उनके मुताबिक, इन पगड़ियों को धार्मिकता या किसान पहचान के प्रतीक के तौर पर देखने के बजाय पारंपरिक शाही शैली के करीब माना जा सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस समारोहों में पगड़ी के बदलते रंग और डिजाइन हर साल चर्चा का विषय रहे हैं। इस बार लाल बंधेज पगड़ी के साथ उनका अंदाज भी समारोह की खास तस्वीरों में शामिल रहा।
