Friday, May 29, 2026
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अब इमरजेंसी में सिर्फ 112 नंबर करेगा मदद, सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश के लिए जारी किए बड़े निर्देश

नई दिल्ली: देशभर में आपातकालीन सेवाओं को लेकर अब बड़ा बदलाव होने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि पुलिस, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और अन्य इमरजेंसी सेवाओं के लिए अलग-अलग नंबरों की जगह अब सिर्फ एक हेल्पलाइन नंबर ‘112’ को प्रभावी रूप से लागू किया जाए। अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस व्यवस्था को लागू करने के लिए तीन महीने का समय दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नागरिकों को समय पर आपातकालीन सहायता और ट्रॉमा केयर उपलब्ध कराना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। अदालत ने पूरे देश में एक मजबूत और एकीकृत इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया।

सभी हेल्पलाइन नंबर होंगे 112 में शामिल

सर्वोच्च अदालत ने निर्देश दिया कि 100, 101, 102, 108, 1033 और 1091 जैसे सभी इमरजेंसी नंबरों को ‘112’ में एकीकृत किया जाए। इसका उद्देश्य यह है कि किसी भी संकट की स्थिति में लोगों को अलग-अलग नंबर याद रखने की जरूरत न पड़े और एक ही नंबर पर तुरंत सहायता मिल सके।

कोर्ट ने कहा कि कई बार अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर होने के कारण लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है, जिससे समय पर मदद नहीं मिल पाती।

SaveLife Foundation की याचिका पर सुनवाई

यह फैसला जस्टिस जे. के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदूरकर की बेंच ने सुनाया। अदालत SaveLife Foundation की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में बेहतर ट्रॉमा केयर और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की मांग की गई थी।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि सड़क हादसों में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं और समय पर सहायता मिलने से कई लोगों की जान बचाई जा सकती है।

गुड समैरिटन स्कीम को भी प्रभावी बनाने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ‘गुड समैरिटन’ योजना को प्रभावी तरीके से लागू करने के निर्देश भी दिए हैं। अदालत ने कहा कि कई लोग कानूनी झंझट और पुलिस कार्रवाई के डर से हादसों में घायल लोगों की मदद करने से बचते हैं।

कोर्ट ने कहा कि लोगों में यह डर रहता है कि उन्हें बाद में थाने बुलाया जा सकता है या गवाह बनाया जा सकता है। ऐसे में इस मानसिकता को बदलने और आम नागरिकों को मदद के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है।

ट्रॉमा केयर सिस्टम मजबूत करने पर जोर

अदालत ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि वे मजबूत ट्रॉमा केयर सिस्टम तैयार करें और पीएम राहत कैशलेस उपचार योजना को प्रभावी रूप से लागू करें। साथ ही प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण और जनजागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया है।

सुप्रीम Court ने कहा कि देशभर में एक समान इमरजेंसी रिस्पॉन्स फ्रेमवर्क तैयार करना अब समय की जरूरत है, ताकि किसी भी आपदा या सड़क हादसे की स्थिति में लोगों को तुरंत और बेहतर सहायता मिल सके।

 

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