श्रीलंका में बड़ी भू-राजनीतिक हलचल! कोलंबो पोर्ट पर पाक के 3 युद्धपोत, भारत का भी तुरंत जवाबी कदम, बढ़ी रणनीतिक टेंशन
कोलंबो: हिंद महासागर क्षेत्र में इन दिनों बड़ा भू-राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल रहा है। श्रीलंका के कोलंबो पोर्ट पर एक साथ भारत और पाकिस्तान के नौसैनिक जहाजों की मौजूदगी ने रणनीतिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब क्षेत्र में पहले से ही सुरक्षा और प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ी हुई है।
कोलंबो पोर्ट पर पाकिस्तान के तीन युद्धपोतों की एंट्री

श्रीलंकाई नौसेना की जानकारी के अनुसार पाकिस्तान नौसेना के तीन प्रमुख पोत—पीएनएस तैमूर, पीएनएस असलत और पनडुब्बी पीएनएस/एम हांगोर—इस सप्ताह कोलंबो पोर्ट पहुंचे। आधिकारिक तौर पर इसे ‘सद्भावना यात्रा’ बताया गया है, जिसमें ईंधन, लॉजिस्टिक सपोर्ट और आपसी सहयोग से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं। इन जहाजों के साथ पाकिस्तानी नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद हैं और इस दौरान श्रीलंकाई नौसेना के साथ संयुक्त अभ्यास की भी योजना है।
पनडुब्बी की मौजूदगी पर बढ़ी निगाहें
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक ध्यान आकर्षित करने वाली बात पाकिस्तानी पनडुब्बी पीएनएस/एम हांगोर की मौजूदगी है, जो चीन में निर्मित बताई जाती है। यही कारण है कि इस दौरे को केवल सामान्य कूटनीतिक यात्रा के बजाय क्षेत्रीय रणनीतिक गतिविधि के तौर पर भी देखा जा रहा है, खासकर इसलिए क्योंकि श्रीलंका के बंदरगाहों पर चीनी तकनीक से जुड़े सैन्य उपकरणों की मौजूदगी को लेकर भारत पहले से सतर्क रहा है।
भारत का भी तुरंत रणनीतिक कदम
इसी दौरान 1 जून 2026 को भारतीय नौसेना का लैंडिंग शिप टैंक आईएनएस ऐरावत भी कोलंबो पोर्ट पहुंचा। आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह जहाज ‘ऑपरेशनल टर्नअराउंड’ यानी ईंधन भरने, विश्राम और तकनीकी जरूरतों के लिए वहां मौजूद है। जहाज की कमान कमांडर आईपी पाटिलफोर के पास है। इस दौरान भारतीय नौसेना के क्रू सदस्य श्रीलंकाई नौसेना के साथ विभिन्न पेशेवर और आपसी सहयोग बढ़ाने वाले कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं।

कूटनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का इस समय अपने युद्धपोत को कोलंबो भेजना केवल एक सामान्य नौसैनिक गतिविधि नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संकेत भी है। यह संदेश माना जा रहा है कि भारत अपने समुद्री क्षेत्र में होने वाली हर गतिविधि पर करीबी नजर बनाए हुए है, खासकर उन परिस्थितियों में जहां पाकिस्तान और चीन की उपस्थिति एक साथ दिखाई दे रही हो।
श्रीलंका की संतुलन साधने की कोशिश
श्रीलंका के लिए यह स्थिति कूटनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। एक तरफ वह भारत के साथ अपने आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को बनाए रखते हुए भारतीय नौसेना का स्वागत कर रहा है, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान और परोक्ष रूप से चीन से जुड़े सैन्य जहाजों को भी बंदरगाह सुविधा प्रदान कर रहा है। ऐसे में श्रीलंका की यह नीति क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है।
