परिसीमन विधेयक पर अमित शाह का ‘साउथ प्लान’! मानसून सत्र का सत्रावसान अब तक नहीं, विशेष सत्र की अटकलें तेज
नई दिल्ली: परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार की तैयारियों के बीच संसद के मानसून सत्र को लेकर हलचल बढ़ गई है। 13 अगस्त को मानसून सत्र समाप्त होने के बावजूद अब तक इसका औपचारिक सत्रावसान नहीं किया गया है। ऐसे में सरकार के पास सत्र को आगे बढ़ाने का विकल्प खुला माना जा रहा है। इसी बीच गृह मंत्री अमित शाह की दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में दक्षिण भारत के राज्यों के साथ हुई बातचीत को भी परिसीमन की संभावित रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
मानसून सत्र खत्म, लेकिन सत्रावसान का ऐलान नहीं

संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त हो चुका है, लेकिन इसके आठ दिन बाद भी सत्रावसान की घोषणा नहीं की गई है। इस वजह से सत्र तकनीकी रूप से अभी समाप्त नहीं हुआ है। सरकार चाहे तो जरूरत पड़ने पर मौजूदा सत्र को ही आगे बढ़ाकर संविधान संशोधन विधेयक पेश कर सकती है।
पिछले करीब साढ़े चार दशक में यह पहली बार बताया जा रहा है कि संसद का सत्र समाप्त होने के आठ दिन बाद भी उसके सत्रावसान की घोषणा नहीं हुई है। इससे परिसीमन विधेयक को लेकर सरकार की संभावित रणनीति पर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
पहले सत्रावसान में लगता था लंबा समय
संसदीय प्रक्रिया के इतिहास पर नजर डालें तो 1952 से लेकर सत्तर के दशक तक संसद का सत्र समाप्त होने और सत्रावसान की घोषणा के बीच छह से 20 दिन तक का अंतर देखा जाता था। हालांकि अस्सी के दशक में व्यापक विचार-विमर्श के बाद यह अवधि घटकर आमतौर पर दो से चार दिन रह गई।
ऐसे में मौजूदा सत्र का आठ दिन बाद भी औपचारिक रूप से सत्रावसान नहीं होना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राष्ट्रपति को अब तक नहीं भेजी गई सलाह
सत्रावसान की प्रक्रिया के तहत दोनों सदनों को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल राष्ट्रपति को सत्रावसान की सलाह देता है। राष्ट्रपति के आदेश के बाद सत्रावसान की प्रक्रिया पूरी होती है।
बताया गया है कि 13 अगस्त को मानसून सत्र समाप्त होने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल की दो बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन अब तक राष्ट्रपति को सत्रावसान की सलाह नहीं दी गई है। इसी वजह से सरकार की अगली रणनीति को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।
-------------------------------------------------------------------------------------------
दक्षिण भारत के राज्यों से संवाद पर नजर
गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक भी इसी दौरान हुई। बैठक में दक्षिण भारत के राज्यों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। राजनीतिक हलकों में इस संवाद को परिसीमन के मुद्दे पर दक्षिणी राज्यों की चिंताओं और संभावित प्रतिक्रिया को समझने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
परिसीमन का मुद्दा दक्षिण भारत के कई राज्यों के लिए संवेदनशील है, क्योंकि लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण को लेकर राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व और जनसंख्या के आधार पर होने वाले संभावित बदलावों पर लंबे समय से बहस होती रही है।
सरकार के पास संख्याबल, लेकिन सहमति पर जोर
सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत को लेकर सरकार के सामने बड़ी चुनौती नहीं है। हालांकि संविधान संशोधन जैसे महत्वपूर्ण विधेयक को सदन में हंगामे के बीच पेश करने से सरकार बचना चाहती है।
इसी वजह से सरकार की कोशिश कांग्रेस के अलावा विपक्षी दलों के बड़े हिस्से को साथ लेने की बताई जा रही है। सरकार के लिए चुनौती सिर्फ संख्याबल जुटाने की नहीं, बल्कि विधेयक को लेकर सदन में पर्याप्त राजनीतिक सहमति और व्यवस्थित माहौल तैयार करने की भी है।
विशेष संसद सत्र की अटकलें भी तेज
मानसून सत्र का सत्रावसान अब तक नहीं होने के कारण विशेष संसद सत्र को लेकर भी राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि सरकार की ओर से विशेष सत्र बुलाए जाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। फिलहाल निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार मानसून सत्र को आगे बढ़ाती है या परिसीमन विधेयक के लिए अलग से संसद की बैठक बुलाने का रास्ता अपनाती है।

