बीबीएयू के प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा को राष्ट्रीय सम्मान, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण आजीविका में योगदान के लिए बिलासपुर में हुए सम्मानित

लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा को हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर में प्राकृतिक खेती एवं ग्रामीण आजीविका संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। यह सम्मान भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री और पांच बार सांसद रहे अनुराग सिंह ठाकुर ने प्राकृतिक खेती विषयक कार्यक्रम के दौरान प्रदान किया। कार्यक्रम का आयोजन मानव विकास संस्थान, हिमाचल प्रदेश द्वारा किया गया।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में निभाई अहम भूमिका
प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा को बिलासपुर जिले के ग्रामीणों की आजीविका में सुधार और प्रकृति आधारित जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उन्होंने विशिष्ट अतिथि के रूप में भाग लिया, जबकि अध्यक्षता अनुराग सिंह ठाकुर ने की। इस अवसर पर पद्मश्री सम्मान से अलंकृत नेकराम शर्मा भी मौजूद रहे।
बीबीएयू कुलपति ने दी बधाई
बीबीएयू के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने प्रो. अरोड़ा को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि उनका सम्मान विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रो. अरोड़ा का शोध एवं सामाजिक योगदान विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला रहा है।
बिलासपुर में स्थापित की बायोफर्टिलाइजर उत्पादन इकाई
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा ने बिलासपुर में एक जैव उर्वरक (बायोफर्टिलाइजर) उत्पादन इकाई भी स्थापित की है। इस पहल से स्थानीय किसानों को टिकाऊ, पर्यावरण अनुकूल और कम लागत वाली कृषि पद्धतियां अपनाने में सहायता मिल रही है, जिससे उनकी आय और उत्पादकता दोनों में सुधार हो रहा है।
अनुराग ठाकुर बोले- प्राकृतिक खेती ही भविष्य का रास्ता

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को पूर्णतः जैविक एवं प्राकृतिक खेती आधारित राज्य बनाना सभी का साझा लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में किसानों, वैज्ञानिकों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उनके अनुसार प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा जैसे वैज्ञानिकों का अनुभव और शोध कार्य प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा किसानों की आजीविका मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
जलवायु परिवर्तन के दौर में प्राकृतिक खेती जरूरी: प्रो. अरोड़ा
सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा ने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य और कृषि क्षेत्र के सामने बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उनकी टीम किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
उन्होंने विश्वास जताया कि वैज्ञानिक नवाचार, प्रशिक्षण कार्यक्रम और किसानों की सक्रिय भागीदारी से प्राकृतिक खेती को व्यापक स्तर पर अपनाया जा सकेगा। साथ ही उन्होंने भविष्य में भी अनुसंधान, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग के माध्यम से किसानों और ग्रामीण आजीविका के विकास के लिए निरंतर कार्य करते रहने की प्रतिबद्धता दोहराई।
एक हजार से अधिक किसानों ने लिया भाग
कार्यशाला में एक हजार से अधिक किसानों ने भाग लिया। इस दौरान अनुराग सिंह ठाकुर, प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा, पद्मश्री नेकराम शर्मा, मानव विकास संस्थान के संस्थापक रसम चंदेल तथा विभिन्न कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों ने बदलते जलवायु परिदृश्य में प्रकृति आधारित खेती की आवश्यकता और महत्व पर किसानों को जागरूक किया। वक्ताओं ने किसानों से रासायनिक खेती पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक एवं जैविक खेती अपनाने का आह्वान किया, ताकि कृषि उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका को भी सशक्त बनाया जा सके।
