गोंडा: कुक्कुट कारोबार में निवेश के बड़े अवसर, 1,500 करोड़ की नीति से 1.25 लाख रोजगार का लक्ष्य; मंडलायुक्त ने बताए फायदे

गोंडा: जिला पंचायत सभागार में मंगलवार को पशुपालन विभाग की ओर से मंडल स्तरीय एक दिवसीय पोल्ट्री कॉन्क्लेव एवं कुक्कुट निवेश मेले का आयोजन किया गया। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस दौरान कुक्कुट पालन से जुड़े उद्यमियों और किसानों को कारोबार की संभावनाओं, सरकारी योजनाओं और वित्तीय सहायता की जानकारी दी गई।

मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने कहा कि कुक्कुट व्यवसाय केवल मुर्गी पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लाभदायक व्यवसाय के साथ बड़े स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने का माध्यम भी बन सकता है। उन्होंने कहा कि देश में कुक्कुट उद्योग तेजी से आगे बढ़ रहा है, जबकि उत्तर प्रदेश में अंडे और कुक्कुट की मांग की तुलना में आपूर्ति में अभी अंतर है। ऐसे में इस क्षेत्र में निवेश की पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं।
1,500 करोड़ रुपये के निवेश और 1.25 लाख रोजगार का लक्ष्य
उत्तर प्रदेश सरकार ने कुक्कुट पालन विकास नीति के तहत 1,500 करोड़ रुपये के निवेश और 1.25 लाख नए रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा है। योजना के तहत उद्यमियों को विभिन्न प्रकार की वित्तीय और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
नीति के तहत पांच वर्षों तक ऋण पर 7 प्रतिशत तक ब्याज अनुदान का प्रावधान है। इसके अलावा एएचआईडीएफ के तहत अतिरिक्त 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान भी दिया जा सकता है। परियोजना लागत का 70 प्रतिशत तक बैंक ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था है, जबकि उद्यमी को 30 प्रतिशत मार्जिन मनी लगानी होगी।
जमीन, बिजली और पूंजीगत अनुदान में भी राहत
कुक्कुट इकाई के लिए जमीन खरीदने या लीज पर लेने पर 100 प्रतिशत स्टांप शुल्क में छूट का प्रावधान है। कुक्कुट इकाई को अगले 10 वर्षों तक विद्युत शुल्क में 100 प्रतिशत छूट भी दी जाएगी।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन के तहत हैचरी और फीड प्लांट स्थापित करने पर 50 प्रतिशत तक पूंजीगत अनुदान का प्रावधान किया गया है। स्वीकृतियों के लिए कुक्कुट निवेश पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। किसानों को कार्यशील पूंजी की जरूरत पूरी करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड से भी जोड़ा जा रहा है।
देवीपाटन मंडल में कुक्कुट कारोबार की अपार संभावनाएं
मंडलायुक्त ने कहा कि देवीपाटन मंडल के गोंडा, बहराइच, बलरामपुर और श्रावस्ती जिले कृषि प्रधान क्षेत्र हैं। इन जिलों में धान, गेहूं और विशेष रूप से मक्का का अच्छा उत्पादन होता है। मक्का कुक्कुट आहार का प्रमुख घटक होने के कारण स्थानीय स्तर पर चारा सामग्री की उपलब्धता इस क्षेत्र की बड़ी ताकत है।

उन्होंने कहा कि मंडल में पर्याप्त भूमि, मानव संसाधन और प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध हैं। इन संसाधनों का बेहतर उपयोग करके कुक्कुट उद्योग को बड़े स्तर पर विकसित किया जा सकता है।
फार्म से लेकर बाजार तक पूरा तंत्र विकसित करने पर जोर
मंडलायुक्त ने कहा कि कुक्कुट क्षेत्र के विकास को केवल फार्म स्थापित करने तक सीमित नहीं रखना चाहिए। चारा मिल, हैचरी, ब्रॉयलर और लेयर फार्म के साथ ग्रेडिंग, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, कोल्ड चेन, परिवहन और विपणन की पूरी व्यवस्था विकसित करने पर ध्यान देना होगा।
उन्होंने कहा कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के विकसित होने से मंडल में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
जैव-सुरक्षा, स्थानीय चारा और बाजार पर रहेगा फोकस
कुक्कुट क्षेत्र के लिए तीन प्रमुख बिंदुओं पर विशेष जोर दिया गया। इनमें जैव-सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पोल्ट्री बीमारियों की रोकथाम, मक्का की स्थानीय उपलब्धता का लाभ लेकर चारे की लागत कम करना और प्रसंस्करण तथा ब्रांडिंग के जरिए बाजार में बेहतर अवसर तैयार करना शामिल है।
मंडलायुक्त ने उद्यमियों और किसानों से सम्मेलन का लाभ उठाने तथा कुक्कुट पालन से जुड़ी योजनाओं की जानकारी लेने की अपील की। उन्होंने बैंकों से वित्तीय सहायता लेने और क्षेत्र के विकास को लेकर अपने सुझाव देने का भी आग्रह किया। उन्होंने विश्वास जताया कि सामूहिक प्रयासों से देवीपाटन मंडल जल्द ही उत्तर प्रदेश का अग्रणी कुक्कुट केंद्र बन सकता है।
कार्यक्रम में अधिकारी और बड़ी संख्या में उद्यमी-किसान रहे मौजूद
कार्यक्रम में जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन, मुख्य विकास अधिकारी सहित मंडल स्तर के विभिन्न अधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा बड़ी संख्या में उद्यमियों और किसानों ने भी कुक्कुट निवेश मेले में सहभागिता की।
