ग्रामीण विकास में महिलाओं की भूमिका पर मंथन: लखनऊ में इंडिया रूरल कोलोक्वी 2026 का आयोजन, पद्मश्री उमाशंकर पांडे बोले- बदलाव आम लोगों की भागीदारी से आता है

लखनऊ: ग्रामीण भारत में समावेशी विकास, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय नेतृत्व को बढ़ावा देने पर केंद्रित ‘इंडिया रूरल कोलोक्वी (IRC) 2026’ के उत्तर प्रदेश चैप्टर का आयोजन मंगलवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के सोशल वर्क विभाग में किया गया। ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (TRI) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों, प्रशासनिक अधिकारियों और जमीनी स्तर पर काम करने वाले प्रतिनिधियों ने ग्रामीण विकास के विभिन्न पहलुओं पर विचार साझा किए।

‘बदलाव सामूहिक भागीदारी से आता है’
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पद्मश्री सम्मानित और ‘जल योद्धा’ उमाशंकर पांडे ने कहा कि देश में होने वाला हर सार्थक बदलाव कुछ ताकतवर लोगों की वजह से नहीं, बल्कि आम लोगों के साथ आने से संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि जब समाज के लोग मिलकर अपनी आवाज उठाते हैं, तभी परिवर्तन की मजबूत नींव तैयार होती है।
महिला नेतृत्व और ग्रामीण उद्यमिता पर विशेष चर्चा
इस वर्ष कार्यक्रम की थीम ‘ग्रामीण कल्याण सूत्रधार के रूप में महिलाएं: कमजोर समुदायों को साझा समृद्धि की ओर ले जाना’ रही। विभिन्न सत्रों में युवा उद्यमिता, ग्रामीण आजीविका और महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा देने से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
सीएम युवा योजना का भी हुआ उल्लेख
एमएसएमई एवं निर्यात संवर्धन विभाग के संयुक्त आयुक्त सर्वेश्वर शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री युवा योजना के माध्यम से करीब दो लाख युवाओं को उद्यम शुरू करने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए युवाओं और महिलाओं का आत्मनिर्भर उद्यमी बनना आवश्यक है।
‘गांवों के विकास के बिना विकसित भारत संभव नहीं’

उत्तर प्रदेश सरकार के राष्ट्रीय एकता विभाग के सचिव हीरालाल (आईएएस) ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है, जब गांवों का समग्र विकास सुनिश्चित हो। उनके अनुसार केवल शहरों का विकास पर्याप्त नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, स्थानीय संस्थाओं और समुदायों को भी समान रूप से सशक्त करना होगा।
महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित रहा संवाद
कार्यक्रम में पंचायती राज विभाग की संयुक्त निदेशक प्रवीणा चौधरी, एसोसिएशन फॉर एडवोकेसी एंड लीगल इनिशिएटिव्स ट्रस्ट (AALI) की कार्यकारी निदेशक रेनू मिश्रा, लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर संदीप गिरी, ट्रिकल अप इंडिया फाउंडेशन की पूर्णा रॉय चौधरी, नाबार्ड के डिप्टी जनरल मैनेजर सिद्धार्थ शंकर सहित कई विशेषज्ञों ने महिला नेतृत्व, वित्तीय समावेशन और ग्रामीण उद्यमिता पर अपने विचार रखे।
TRI ने रखा महिला नेतृत्व आधारित विकास का विजन
ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया के एसोसिएट डायरेक्टर राजीव त्रिपाठी ने कहा कि ग्रामीण परिवर्तन की वास्तविक शुरुआत तब होती है, जब महिलाएं केवल परिवार तक सीमित न रहकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सक्रिय निर्माता बनती हैं। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों, जलवायु-अनुकूल कृषि और स्थानीय शासन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया।
नीतिगत सुधार और साझेदारी पर भी चर्चा
संगोष्ठी के दौरान विशेषज्ञों ने महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा देने, वित्तीय समावेशन मजबूत करने, संस्थागत नवाचार और विभिन्न साझेदारियों को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। समापन सत्र में दिनभर की चर्चाओं के प्रमुख निष्कर्षों के आधार पर उत्तर प्रदेश में महिला-नेतृत्व वाले ग्रामीण विकास के लिए साझा कार्ययोजना पर भी विचार किया गया।
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