Friday, June 12, 2026
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PM मोदी को ‘सपेरा’ दिखाने वाले कार्टून पर बवाल, नॉर्वे के अखबार पर भड़के लोग; सोशल मीडिया पर छिड़ी तीखी बहस

ओस्लो: नॉर्वे के प्रमुख अखबार ‘आफ़्टेनपोस्टेन’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर प्रकाशित एक कार्टून ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा कर दिया है। कार्टून में प्रधानमंत्री मोदी को पारंपरिक शैली में ‘सपेरा’ दिखाया गया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर इसे भारत और भारतीयों की छवि को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

प्रकाशित कार्टून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘पुंगी’ बजाते हुए दर्शाया गया था, जबकि उनके सामने पेट्रोल पंप की नोजल के आकार का सांप दिखाई दे रहा था। इसे पेट्रोल-डीजल की कीमतों से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में प्रकाशित किया गया। यह कार्टून एक राय लेख के साथ छापा गया था, जिसका अनुवादित शीर्षक था — “एक चतुर और थोड़ा परेशान करने वाला व्यक्ति।”

कार्टून सामने आने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लोगों ने इसे नस्लवादी और औपनिवेशिक मानसिकता से प्रेरित बताया। कई यूजर्स ने कहा कि दुनिया अब भी भारत को “सपेरों का देश” बताने वाली पुरानी सोच से बाहर नहीं निकल पाई है, जबकि आज भारत तकनीक, डिजिटल सेवाओं और वैश्विक नवाचार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

यह विवाद इसलिए भी अधिक चर्चा में आ गया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में अपने संबोधन के दौरान कहा था कि कभी दुनिया भारत को “Snake Charmers” के देश के रूप में देखती थी, लेकिन अब भारत “Mouse Charmers” यानी तकनीकी विशेषज्ञों और डिजिटल प्रतिभाओं का देश बन चुका है।

हालांकि इस पूरे विवाद पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कुछ लोगों का कहना है कि राजनीतिक कार्टून लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा होते हैं तथा मीडिया का दायित्व सरकारों और नेताओं पर सवाल उठाना भी है। वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोगों ने इसे भारत और भारतीय नेतृत्व के प्रति अपमानजनक प्रस्तुति करार दिया।

यह मामला हाल ही में नॉर्वे की पत्रकार हेल्ले लिंग और भारतीय अधिकारियों के बीच हुए विवाद के बाद सामने आया है। बताया गया कि पत्रकार ने प्रधानमंत्री मोदी से प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सवाल पूछने की कोशिश की थी। इसके बाद विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी सिबी जॉर्ज ने भारत के लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों का पक्ष रखते हुए कहा था कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और कुछ विदेशी रिपोर्टों के आधार पर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को आंकना उचित नहीं है।

सिबी जॉर्ज ने भारत के संविधान, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक संस्थाओं का उल्लेख करते हुए कहा था कि भारत की लोकतांत्रिक परंपराएं मजबूत और व्यापक हैं।

 

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