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रिटायर्ड सूबेदार मेजर के बेटे ने बढ़ाया मान, IMA से पासआउट होकर बने लेफ्टिनेंट; परिवार और गांव में जश्न का माहौल

लखनऊ: राजधानी लखनऊ की हसियामऊ कॉलोनी इन दिनों गर्व और खुशी के माहौल में डूबी हुई है। यहां रहने वाले रिटायर्ड सूबेदार मेजर नरेंद्र सिंह के बेटे सुशांत सिंह ने भारतीय सेना में अधिकारी बनकर न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। 13 जून 2026 को देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री अकादमी में आयोजित पासिंग आउट परेड के दौरान उन्हें भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर कमीशन प्राप्त हुआ।

राष्ट्रपति और तीनों सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू की उपस्थिति में आयोजित इस गौरवपूर्ण समारोह में सुशांत ने सेना के अधिकारी के रूप में अपने नए सफर की शुरुआत की। जैसे ही उनके कमीशन मिलने की खबर घर पहुंची, परिवार, रिश्तेदारों और परिचितों में खुशी की लहर दौड़ गई।

देशसेवा को चुना, आकर्षक करियर विकल्पों को कहा अलविदा

बचपन से ही पढ़ाई में उत्कृष्ट रहे सुशांत के सामने 12वीं के बाद इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे कई प्रतिष्ठित करियर विकल्प मौजूद थे। हालांकि उन्होंने देशसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए भारतीय सेना में जाने का निर्णय लिया। यह फैसला उनके दृढ़ संकल्प और राष्ट्र के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

माता-पिता के त्याग ने बनाई सफलता की राह

सुशांत की इस उपलब्धि के पीछे उनके परिवार का बड़ा योगदान रहा है। सेना में सेवा के दौरान पिता नरेंद्र सिंह की विभिन्न दूरदराज क्षेत्रों में तैनाती रहती थी। ऐसे में उनकी माता बिंदु सिंह ने बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए लखनऊ में रहने का फैसला किया, ताकि उन्हें बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।

आज बेटे की सफलता पर भावुक होती हुईं बिंदु सिंह कहती हैं कि एक मां के लिए इससे बड़ा गर्व का विषय क्या हो सकता है कि उसका बेटा देश की सेवा के लिए सेना में गया है।

दोस्तों और शिक्षकों ने जताया गर्व

सुशांत के सेना में अधिकारी बनने की खबर के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें बधाइयां देने वालों का सिलसिला लगातार जारी है। उनके मित्रों में उत्साह का माहौल है, वहीं विद्यालय के शिक्षक भी अपने पूर्व छात्र की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहे हैं।

विद्यालय के एक वरिष्ठ शिक्षक ने कहा कि सुशांत ने अपनी मेहनत, अनुशासन और समर्पण से संस्थान का नाम रोशन किया है। उनकी सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।

बिहार के पैतृक गांव में भी खुशी की लहर

सुशांत की इस उपलब्धि का उत्सव केवल लखनऊ तक सीमित नहीं है। बिहार के सिवान जिले स्थित उनके पैतृक गांव गौरी और ननिहाल रुइया बंगरा में भी खुशी का माहौल है। परिजन और ग्रामीण उनके स्वागत की तैयारियों में जुटे हुए हैं।

हालांकि जब उनके माता-पिता से बेटे के स्वागत की योजनाओं के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बेहद सादगी से कहा कि कोई विशेष योजना नहीं है, क्योंकि सुशांत एक सामान्य इंसान है। लेकिन उनकी इस उपलब्धि को देखते हुए इतना जरूर कहा जा सकता है कि देश की वर्दी पहनकर राष्ट्रसेवा का दायित्व संभालने वाला हर जवान अपने आप में एक नायक होता है।

 

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