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AI मशीन में डालो खाली बोतल, तुरंत मिलेंगे ₹10; तमिलनाडु का अनोखा मॉडल बना देश के लिए मिसाल

चेन्नई: शराब की खाली बोतलों से फैलने वाले कचरे और पर्यावरणीय नुकसान पर लगाम लगाने के लिए तमिलनाडु ने तकनीक का सहारा लेते हुए एक अनोखी पहल शुरू की है। राज्य की राजधानी चेन्नई के एग्मोर इलाके में स्थित सरकारी शराब दुकान पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित स्वचालित बोतल संग्रह मशीन लगाई गई है। इस मशीन में खाली कांच की बोतल जमा करते ही उपभोक्ताओं को तत्काल 10 रुपये की राशि वापस मिल रही है। यह पहल स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

कैसे काम करती है स्मार्ट बोतल कलेक्शन मशीन?

‘रिवर्स वेंडिंग मशीन’ नाम से स्थापित यह अत्याधुनिक प्रणाली कैमरों और सेंसरों की मदद से बोतलों की पहचान और सत्यापन करती है। जैसे ही कोई व्यक्ति मशीन में खाली बोतल डालता है, सिस्टम उसकी बनावट, आकार, ब्रांड और गुणवत्ता की जांच करता है। यदि बोतल निर्धारित मानकों के अनुरूप पाई जाती है तो मशीन तुरंत 10 रुपये का रिफंड जारी कर देती है। भविष्य में इस व्यवस्था को डिजिटल भुगतान प्रणाली से जोड़ने की भी तैयारी की जा रही है।

पर्यावरणीय संकट से निपटने के लिए शुरू हुई पहल

तमिलनाडु के पर्यटन स्थलों और पहाड़ी क्षेत्रों में फेंकी जा रही शराब की खाली बोतलें लंबे समय से पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई थीं। जंगलों, घाटियों और सड़क किनारे पड़े टूटे कांच से वन्यजीवों और पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा था। इसी समस्या को देखते हुए नीलगिरी और कोडाइकनाल जैसे क्षेत्रों में सबसे पहले बोतल वापसी अभियान शुरू किया गया था।

हाई कोर्ट के निर्देश के बाद बनी व्यवस्था

खाली बोतलों के निस्तारण और रीसाइक्लिंग को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान मद्रास हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को प्रभावी व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद प्रत्येक शराब की बोतल पर 10 रुपये अतिरिक्त जमा राशि लेने और बोतल लौटाने पर वही राशि वापस करने की प्रणाली लागू की गई।

योजना की निगरानी कर रहा है हाई कोर्ट

साल 2022 में शुरू हुई इस योजना पर अदालत लगातार नजर बनाए हुए है। न्यायालय ने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया है कि उपभोक्ताओं को उनका रिफंड समय पर मिले और पूरी व्यवस्था प्रभावी तरीके से संचालित हो। अदालत ने यह भी कहा है कि योजना केवल कागजी प्रक्रिया बनकर न रह जाए।

अब पूरे राज्य में होगा विस्तार

योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद राज्य सरकार इसे तमिलनाडु के अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने की तैयारी कर रही है। अदालत ने भी निर्देश दिया है कि बोतल वापसी और रीसाइक्लिंग मॉडल को सीमित इलाकों तक न रखकर व्यापक स्तर पर लागू किया जाए।

दुनिया के सफल मॉडल से प्रेरित है व्यवस्था

दुनिया के कई देशों में बोतल वापसी की ऐसी व्यवस्था पहले से लागू है। जर्मनी की प्रसिद्ध ‘पफांड’ प्रणाली में उपभोक्ता से बोतल खरीदते समय अतिरिक्त राशि ली जाती है और वापसी पर उसे लौटा दिया जाता है। इसी मॉडल की बदौलत वहां 90 से 95 प्रतिशत तक बोतलें दोबारा रीसाइक्लिंग प्रक्रिया में शामिल हो जाती हैं।

रीसाइक्लिंग उद्योग को भी मिलेगा बड़ा फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि खाली बोतलों को कचरे के बजाय संसाधन के रूप में देखने की यह सोच पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ रीसाइक्लिंग उद्योग को भी नई मजबूती देगी। अच्छी स्थिति वाली बोतलों का पुनः उपयोग किया जाएगा, जबकि क्षतिग्रस्त कांच को पिघलाकर नई बोतलें, जार, दवा की शीशियां और अन्य उत्पाद तैयार किए जाएंगे।

तमिलनाडु में पहले से मौजूद मजबूत कांच निर्माण और रीसाइक्लिंग तंत्र इस परियोजना को और अधिक प्रभावी बना सकता है। विशेषज्ञ इसे स्वच्छता, संसाधनों के बेहतर उपयोग और टिकाऊ अर्थव्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मान रहे हैं।

 

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