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बीबीएयू में स्वरचित कविता पाठ प्रतियोगिता, हिंदी की महत्ता और सामाजिक मुद्दों पर कवियों ने रखे विचार

लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में राजभाषा हिंदी उत्सव-2026 के तहत स्वरचित कविता पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। हिंदी प्रकोष्ठ की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने उत्साह के साथ प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता में हिंदी भाषा, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया।

हिंदी संरक्षण और सामाजिक मुद्दों पर लिखी गईं कविताएं

प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने हिंदी भाषा की महत्ता, उसके संरक्षण और वर्तमान समय में उसकी उपयोगिता को लेकर स्वरचित कविताएं प्रस्तुत कीं। इसके अलावा नारी सशक्तिकरण, दहेज प्रथा, सामाजिक कुरीतियों, देशभक्ति और समसामयिक विषयों को भी कविताओं का आधार बनाया गया।

प्रतिभागियों ने प्रभावशाली शब्दों, भावपूर्ण अभिव्यक्ति और काव्य शैली के माध्यम से अपनी रचनात्मक प्रतिभा दिखाई।

निर्णायकों ने प्रतिभागियों की रचनाओं की सराहना की

कार्यक्रम में निर्णायक के रूप में समाजशास्त्र विभाग की प्रो. जया श्रीवास्तव और हिंदी विभाग की डॉ. प्रीति राय मौजूद रहीं। प्रो. जया श्रीवास्तव ने प्रतिभागियों की कविताओं का विषयवस्तु, भावाभिव्यक्ति और काव्यात्मक प्रस्तुति के आधार पर विश्लेषण किया।

उन्होंने कहा कि हिंदी के प्रति सम्मान और दैनिक जीवन में इसके अधिकाधिक प्रयोग से राजभाषा के विकास और संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों की रचनात्मक सोच की सराहना करते हुए हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए प्रेरित किया।

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कविता को बताया भावनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति

डॉ. प्रीति राय ने कहा कि सृजन की प्रक्रिया में संवेदनशीलता, निरंतर चिंतन और अभिव्यक्ति की क्षमता जरूरी होती है। उन्होंने कहा कि कविता केवल शब्दों का संयोजन नहीं होती, बल्कि यह भावनाओं को एक-दूसरे तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम है।

उन्होंने प्रतिभागियों की कविताओं की विषयवस्तु, भाषा, भाव और प्रस्तुति की सराहना करते हुए साहित्यिक गतिविधियों में निरंतर सक्रिय रहने के लिए प्रेरित किया।

विजेताओं को समापन समारोह में किया जाएगा सम्मानित

प्रतियोगिता में प्रस्तुत कविताओं में भावनात्मक गहराई, शब्दों की सुंदरता और लय की मधुरता देखने को मिली। निर्णायक मंडल द्वारा विषय की प्रासंगिकता, भावाभिव्यक्ति, काव्य की लय और श्रोताओं पर प्रभाव के आधार पर परिणाम तय किए जाएंगे। प्रतियोगिता के विजेताओं को राजभाषा हिंदी उत्सव-2026 के समापन सत्र में सम्मानित किया जाएगा।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. नमिता जैसल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर हिंदी अनुवाद अधिकारी डॉ. संध्या दीक्षित, अन्य शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे।

 

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