बीबीएयू में राज्य स्तरीय विमर्श कार्यक्रम, भारतीय ज्ञान प्रणाली और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

लखनऊ: बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में 16 सितंबर को भारतीय ज्ञान प्रणाली और विद्यार्थियों के मानसिक कल्याण को लेकर राज्य स्तरीय विमर्श कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बीबीएयू और मनोदर्पण प्रकोष्ठ, एनसीईआरटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम में विद्यार्थियों के समग्र विकास, मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई।

कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने भारतीय ज्ञान परंपरा की महत्ता बताई
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय और पाश्चात्य दर्शन के बीच तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत करते हुए दोनों की जीवन दृष्टि और प्रकृति के प्रति सोच पर प्रकाश डाला।
प्रो. मित्तल ने कहा कि भारतीय दर्शन में संसाधनों के संतुलित उपयोग और प्रकृति के साथ सामंजस्य पर जोर दिया गया है, जबकि आधुनिक उपभोक्तावादी सोच ने संसाधनों के अधिक उपयोग को बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में व्यक्ति, समाज, सभ्यता, प्रकृति और पर्यावरण को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ माना गया है।
भारतीय ज्ञान प्रणाली को शिक्षा से जोड़ने पर दिया जोर
कुलपति ने भारत की प्राचीन ज्ञान-विज्ञान परंपरा और समृद्ध इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत प्राचीन समय में वैश्विक व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। उन्होंने शिक्षकों से भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत को विद्यार्थियों तक पहुंचाने और उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का आह्वान किया।
उन्होंने भारतीय ज्ञान प्रणाली में वर्णित पंचकोश की अवधारणा अन्नमय कोश, प्राणमय कोश, मनोमय कोश, विज्ञानमय कोश और आनंदमय कोश पर चर्चा करते हुए कहा कि यह व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और भावनात्मक विकास को समझने का मार्ग प्रदान करती है।
मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक विकास पर हुई चर्चा
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उत्तर प्रदेश के लखनऊ में समग्र शिक्षा (माध्यमिक) के संयुक्त शिक्षा निदेशक विवेक नौटियाल ने विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक कल्याण और व्यक्तित्व विकास पर अपने विचार रखे।
उन्होंने एनसीईआरटी के मनोदर्पण प्रकोष्ठ द्वारा विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के मानसिक स्वास्थ्य एवं मनोसामाजिक सहयोग के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मनोदर्पण के माध्यम से टेली-काउंसलिंग सुविधा, विशेषज्ञों से संवाद, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम और तनाव व चिंता जैसी समस्याओं से निपटने के लिए मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है।
शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका को बताया महत्वपूर्ण
विवेक नौटियाल ने कहा कि बच्चों की भावनात्मक जरूरतों को समझना और उन्हें सुरक्षित व सहयोगात्मक वातावरण देना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका विद्यार्थियों के मानसिक और भावनात्मक विकास में अहम होती है।
विभिन्न जिलों के शिक्षकों ने किया प्रतिभाग
कार्यक्रम में एनसीईआरटी के डिपार्टमेंट ऑफ एजुकेशनल साइकोलॉजी एंड फाउंडेशन ऑफ एजुकेशन के प्रमुख प्रो. प्रभात कुमार मिश्रा ऑनलाइन माध्यम से शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम से संबंधित रिपोर्ट का प्रस्तुतीकरण करते हुए प्रमुख बिंदुओं, निष्कर्षों और महत्वपूर्ण तथ्यों को साझा किया।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के शिक्षक-शिक्षिकाओं तथा विशेष शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में मनोदर्पण प्रकोष्ठ के प्रभारी प्रो. विनोद कुमार शनवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

