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गिरनार फाउंडेशन की ‘सो टू ग्रो’ पहल का तीसरा संस्करण पूरा, 67 हजार सीड बॉल्स तैयार कर वन क्षेत्रों में वितरित

गुरुग्राम: कारदेखो ग्रुप की सीएसआर इकाई गिरनार फाउंडेशन ने अपनी वार्षिक ‘सो टू ग्रो’ पहल के तीसरे संस्करण का सफलतापूर्वक समापन किया। एक महीने तक चली इस पहल के तहत जयपुर और गुरुग्राम में कर्मचारियों, छात्रों, शैक्षणिक संस्थानों, गैर सरकारी संगठनों, सरकारी निकायों और पर्यावरण से जुड़े सहयोगियों की भागीदारी से 67 हजार सीड बॉल्स तैयार कर वितरित किए गए।

पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक भागीदारी

इस पहल का उद्देश्य पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्स्थापन को बढ़ावा देना, हरित क्षेत्र का विस्तार करना और पर्यावरण संरक्षण में समुदाय की भागीदारी बढ़ाना रहा। गिरनार फाउंडेशन के कर्मचारियों ने सीड बॉल्स तैयार करने और उनके वितरण में सक्रिय भूमिका निभाई।

अभियान के तहत उदयन केयर, महात्मा गांधी गवर्नमेंट स्कूल और प्रज्ञा निकेतन समेत विभिन्न संस्थानों के सहयोग से सीड बॉल निर्माण कार्यशालाएं आयोजित की गईं। इन कार्यशालाओं में बच्चों और युवाओं ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। इसके जरिए उनमें कम उम्र से ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता और सामुदायिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया।

वन विभाग और स्थानीय संगठनों के साथ मिलकर वितरण

पहल के तहत राजस्थान और हरियाणा के वन विभागों, सेव अरावली ट्रस्ट, शैक्षणिक संस्थानों और सामुदायिक सहयोगियों के साथ मिलकर चिन्हित वन क्षेत्रों और हरित स्थलों पर बड़े स्तर पर सीड बॉल वितरण अभियान चलाया गया।

सामुदायिक स्तर पर पौधारोपण को प्रोत्साहित करने के लिए हजारों सीड बॉल्स स्कूलों और गैर सरकारी संगठनों को भी वितरित किए गए। फाउंडेशन के अनुसार इस सामूहिक प्रयास का उद्देश्य जैव विविधता को मजबूत करना और स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में योगदान देना है।

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सतत विकास लक्ष्यों से जुड़ी पहल

‘सो टू ग्रो’ पहल संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों के लक्ष्य 11 यानी सतत शहर एवं समुदाय और लक्ष्य 13 यानी जलवायु कार्रवाई के अनुरूप संचालित की जा रही है। फाउंडेशन का कहना है कि इस पहल के जरिए पर्यावरण संरक्षण को सामुदायिक भागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

तीन साल में वार्षिक परंपरा बनी ‘सो टू ग्रो’

गिरनार फाउंडेशन की प्रमुख पीहू जैन ने कहा कि सार्थक पर्यावरणीय बदलाव की शुरुआत सामूहिक प्रयासों से होती है। उनके अनुसार पिछले तीन वर्षों में ‘सो टू ग्रो’ फाउंडेशन की वार्षिक परंपरा बन गई है, जिसके माध्यम से कर्मचारियों को स्कूलों, गैर सरकारी संगठनों, समुदायों और सरकारी सहयोगियों के साथ जोड़ा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से शुरू हुई यह पहल अब साझा आंदोलन का रूप ले रही है और लोगों को अधिक भागीदारी के लिए प्रेरित कर रही है। फाउंडेशन भविष्य में भी सहयोग और साझा जिम्मेदारी के जरिए स्थायी पर्यावरणीय प्रभाव पैदा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

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