Monday, June 1, 2026
Latest:
देश

देश में गहराया जल संकट! 22 दिनों में जलाशयों का 12% पानी हुआ गायब, कई बड़े बांध पहुंचे खतरे के स्तर पर

नई दिल्ली: भीषण गर्मी के बीच देश के जल संसाधनों को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। केंद्रीय जल आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार मई महीने के दौरान देश के प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर तेजी से घटा है। हालात ऐसे हैं कि महज 22 दिनों में जल भंडारण में 12 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है और अब कुल क्षमता का केवल 25 प्रतिशत पानी ही शेष बचा है।

देश के 166 प्रमुख जलाशयों में मई के अंतिम सप्ताह तक कुल लाइव स्टोरेज घटकर 45.419 बिलियन क्यूबिक मीटर रह गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो कई क्षेत्रों में जल संकट और गंभीर हो सकता है।

मई में तेजी से खाली हुए जलाशय

आंकड़ों के मुताबिक मई के शुरुआती सप्ताह में इन जलाशयों में 66.830 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी मौजूद था, जो उनकी कुल क्षमता का 36.41 प्रतिशत था। लेकिन बढ़ती गर्मी और पानी की लगातार बढ़ती मांग के कारण महीने के अंत तक लगभग 21.411 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी कम हो गया।

मौसम विभाग पहले ही अल नीनो के प्रभाव के चलते सूखे जैसी परिस्थितियों की आशंका जता चुका है। ऐसे में जलाशयों में तेजी से घटता जल स्तर आने वाले दिनों की चिंता बढ़ा रहा है। हालांकि वर्तमान भंडारण पिछले वर्ष की समान अवधि और पिछले दस वर्षों के औसत से कुछ बेहतर बताया जा रहा है।

बढ़ रही संकटग्रस्त बांधों की संख्या

मई की शुरुआत में देश के 112 बांधों में जल स्तर सामान्य से बेहतर स्थिति में था, लेकिन महीने के अंत तक तस्वीर बदल गई। भीषण गर्मी और लगातार पानी की खपत के कारण कई जलाशयों का स्तर तेजी से गिरा है।

स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गंभीर संकट की श्रेणी में आने वाले बांधों की संख्या 11 से बढ़कर 15 हो गई है। महाराष्ट्र के सतारा जिले स्थित कोयना बांध भी इस समय गंभीर दबाव का सामना कर रहा है।

दक्षिण भारत में सबसे ज्यादा चिंता

जल संकट की सबसे गंभीर स्थिति दक्षिण भारत में दिखाई दे रही है। मई की शुरुआत में यहां के जलाशयों में कुल क्षमता का 26.83 प्रतिशत पानी मौजूद था, लेकिन मई के अंतिम सप्ताह तक यह घटकर केवल 17.55 प्रतिशत रह गया।

जल स्तर में इस भारी गिरावट का असर कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में साफ दिखाई देने लगा है, जहां पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ रही है। कई क्षेत्रों में भविष्य की जलापूर्ति को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी सतर्कता बरती जा रही है।

कुछ बड़े बांध पूरी तरह सूखे

देश के कई हिस्सों में हालात बेहद गंभीर हो चुके हैं। महाराष्ट्र का भीमा उज्जैनी बांध और बिहार का चंदन बांध मई की शुरुआत से लेकर अंत तक पूरी तरह सूखे रहे। इन दोनों जलाशयों में जल स्तर शून्य प्रतिशत दर्ज किया गया, जो जल संकट की गंभीरता को दर्शाता है।

बिजली उत्पादन पर भी मंडराया खतरा

जल स्तर में लगातार गिरावट का असर अब बिजली उत्पादन पर भी पड़ सकता है। देश की 20 प्रमुख जल विद्युत परियोजनाओं से जुड़े जलाशयों में से 8 का जल भंडारण मई की शुरुआत में ही सामान्य स्तर से नीचे पहुंच चुका था। अब इनमें से 6 बड़े जलाशयों की स्थिति बेहद नाजुक बताई जा रही है।

क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो मध्य भारत में जल भंडारण 41.57 प्रतिशत से घटकर 26.60 प्रतिशत रह गया है, जबकि पश्चिमी भारत में यह 42.36 प्रतिशत से गिरकर 28.53 प्रतिशत पर पहुंच गया है। साबरमती जैसी छोटी नदी घाटियों में भी पानी की भारी कमी दर्ज की गई है।

मानसून पर टिकी उम्मीदें

देश के कई हिस्सों में तेजी से घटते जल भंडारण के बीच अब लोगों, किसानों और प्रशासन की उम्मीदें आगामी मानसून पर टिकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर और सामान्य से बेहतर बारिश ही इस बढ़ते जल संकट से राहत दिला सकती है।

 

---------------------------------------------------------------------------------------------------