Thursday, May 21, 2026
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भारत का सबसे बड़ा जिला कौन? क्षेत्रफल इतना विशाल कि हरियाणा-केरल भी पड़ जाएं छोटे, इतिहास भी बेहद खास

गांधीनगर: भारत के राज्यों, जिलों और उनके भूगोल से जुड़े सवाल अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं और इंटरव्यू में पूछे जाते हैं। इन्हीं में एक बेहद दिलचस्प सवाल है कि आखिर भारत का सबसे बड़ा जिला कौन सा है? इसका जवाब जानकर कई लोग हैरान रह जाते हैं, क्योंकि यह जिला क्षेत्रफल के मामले में देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से भी बड़ा है।

भारत का सबसे बड़ा जिला गुजरात राज्य का कच्छ जिला है। विशाल क्षेत्रफल, ऐतिहासिक विरासत और अनोखी भौगोलिक बनावट के कारण कच्छ देशभर में अलग पहचान रखता है। यह जिला न केवल अपने सफेद रण के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसका इतिहास भी बेहद समृद्ध और प्राचीन माना जाता है।

45 हजार वर्ग किलोमीटर से ज्यादा में फैला है कच्छ

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कच्छ जिले का कुल क्षेत्रफल करीब 45,674 वर्ग किलोमीटर है। यही वजह है कि इसे भारत का सबसे बड़ा जिला माना जाता है। इसका क्षेत्रफल कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से भी अधिक है।

तुलना करें तो हरियाणा का क्षेत्रफल करीब 44,212 वर्ग किलोमीटर और केरल का क्षेत्रफल लगभग 38,863 वर्ग किलोमीटर है। वहीं गोवा, दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश तो कच्छ के मुकाबले काफी छोटे हैं।

कच्छ के सामने छोटे पड़ जाते हैं कई राज्य

क्षेत्रफल के लिहाज से कच्छ कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से बड़ा है। इनमें हरियाणा, केरल और गोवा जैसे राज्य शामिल हैं। वहीं दिल्ली, पुडुचेरी, चंडीगढ़, लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार जैसे केंद्र शासित प्रदेश भी कच्छ से छोटे हैं।

कच्छ जिला – 45,674 वर्ग किमी
हरियाणा – 44,212 वर्ग किमी
केरल – 38,863 वर्ग किमी
गोवा – 3,702 वर्ग किमी
दिल्ली – 1,484 वर्ग किमी
चंडीगढ़ – 114 वर्ग किमी

महाभारत और प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है उल्लेख

कच्छ का इतिहास भी बेहद रोचक माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार इस क्षेत्र का उल्लेख महाभारत और कई प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। माना जाता है कि इसकी भौगोलिक आकृति कछुए जैसी दिखाई देती थी, जिसके कारण इसका नाम ‘कच्छ’ पड़ा।

प्राचीन समय में यह क्षेत्र ‘अभिर’ नाम से जाना जाता था। यूनानी यात्रियों ने भी अपने विवरणों में इस इलाके को ‘अभिरिया’ और ‘अभिर’ के नाम से दर्ज किया है। कच्छ लंबे समय तक व्यापार, समुद्री संपर्क और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है।

रण ऑफ कच्छ से दुनियाभर में पहचान

कच्छ की पहचान विश्व प्रसिद्ध रण ऑफ कच्छ से भी जुड़ी हुई है। यहां का सफेद रेगिस्तान देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता है। इसके अलावा यह क्षेत्र पाकिस्तान, राजस्थान और अरब सागर से घिरा हुआ है, जिससे इसकी सामरिक और भौगोलिक महत्व भी बढ़ जाता है।

इतिहास में यहां मौर्य, गुप्त और चावड़ा वंश का शासन रहा, जबकि बाद में जडेजा राजवंश ने लंबे समय तक यहां राज किया। वर्तमान कच्छ जिला पुराने कच्छ क्षेत्र और मोरबी रियासत के 10 गांवों को मिलाकर बनाया गया था।

1960 में गुजरात का हिस्सा बना कच्छ

आजादी के बाद कच्छ कुछ समय तक भारत सरकार के प्रशासन के अधीन भाग-सी राज्य के रूप में रहा। वर्ष 1956 में राज्य पुनर्गठन के बाद इसे बंबई राज्य में शामिल किया गया। इसके बाद 1 मई 1960 को गुजरात राज्य के गठन के साथ कच्छ आधिकारिक रूप से गुजरात का हिस्सा बन गया।

कच्छ का मुख्यालय भुज है, जो जिले की प्रशासनिक और सांस्कृतिक पहचान माना जाता है। आज कच्छ अपनी विशालता, संस्कृति, पर्यटन और ऐतिहासिक महत्व के कारण देश के सबसे खास जिलों में गिना जाता है।

 

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