पश्चिम एशिया संकट के असर से रियल एस्टेट परियोजनाओं को मिली 4 महीने की मोहलत, यूपी रेरा ने बढ़ाई पंजीकरण अवधि

उत्तर प्रदेश भू-संपदा नियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) ने पश्चिम एशिया में बने हालात के कारण रियल एस्टेट क्षेत्र पर पड़े असर को देखते हुए पात्र पंजीकृत परियोजनाओं को चार महीने की अतिरिक्त मोहलत देने का फैसला किया है। इस फैसले के तहत पात्र परियोजनाओं के पंजीकरण की वैधता और निर्धारित पूर्णता अवधि चार महीने बढ़ जाएगी।

किन परियोजनाओं को मिलेगा विस्तार
यूपी रेरा के अनुसार, जिन पंजीकृत परियोजनाओं की मूल, संशोधित या पहले से बढ़ाई गई पूर्णता तिथि 28 फरवरी 2026 से 31 अक्टूबर 2026 के बीच है, वे इस राहत के दायरे में आएंगी। चार महीने का विस्तार परियोजना की मौजूदा पंजीकरण वैधता की अंतिम तारीख से लागू होगा।
यह फैसला केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की 31 जुलाई 2026 की सलाह के आधार पर लिया गया है। मंत्रालय ने असाधारण परिस्थितियों से प्रभावित रियल एस्टेट परियोजनाओं को सामूहिक आदेश के जरिए चार महीने की अतिरिक्त अवधि देने का सुझाव दिया था।
राहत के लिए इन शर्तों को पूरा करना जरूरी
चार महीने की अतिरिक्त अवधि का लाभ लेने के लिए परियोजना प्रवर्तकों को निर्धारित नियामकीय शर्तें पूरी करनी होंगी। 28 फरवरी 2026 को स्वीकृत नक्शे, लेआउट या भवन योजना की वैधता होना जरूरी है। इसके साथ ही पंजीकरण की अंतिम वैधता तिथि तक सभी लंबित त्रैमासिक प्रगति रिपोर्ट जमा करनी होंगी और वित्तीय वर्ष 2024-25 की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
इन सभी शर्तों को पूरा करने वाली पात्र परियोजनाओं का पंजीकरण स्वतः चार महीने के लिए बढ़ा दिया जाएगा। यदि किसी प्रवर्तक का कोई अनुपालन लंबित है तो वह उसे पूरा कर प्राधिकरण को लिखित अनुरोध कर सकता है। सत्यापन के बाद यूपी रेरा का तकनीकी विभाग पंजीकरण अवधि बढ़ाने की प्रक्रिया पूरी करेगा।
पूर्णता या अधिभोग प्रमाणपत्र वाली परियोजनाएं बाहर
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जिन परियोजनाओं को पहले ही पूर्णता प्रमाणपत्र या अधिभोग प्रमाणपत्र मिल चुका है, उन्हें इस चार महीने के विस्तार का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसी परियोजनाओं को अतिरिक्त पूर्णता अवधि की आवश्यकता नहीं मानी गई है।
खरीदारों के अधिकारों पर नहीं पड़ेगा असर
यूपी रेरा ने स्पष्ट किया है कि चार महीने की यह अतिरिक्त अवधि केवल परियोजना के रेरा पंजीकरण और प्राधिकरण के रिकॉर्ड में दर्ज निर्धारित पूर्णता अवधि पर लागू होगी। प्रवर्तक और खरीदार के बीच पहले से हुए बिक्री समझौते के अधिकार और दायित्व पहले की तरह लागू रहेंगे।
बिक्री समझौते में तय कब्जा देने की तारीख में भी कोई बदलाव नहीं होगा। रेरा की ओर से परियोजना को अतिरिक्त समय मिलने के बावजूद समझौते में निर्धारित कब्जे की तारीख प्रभावी रहेगी।
देरी पर ब्याज के नियम भी नहीं बदलेंगे
कब्जा देने में देरी होने पर प्रवर्तक द्वारा खरीदार को दिए जाने वाले ब्याज और खरीदार की ओर से भुगतान में देरी होने पर प्रवर्तक को देय ब्याज के नियम इस विस्तार से प्रभावित नहीं होंगे।
यूपी रेरा के मुताबिक, इस फैसले का उद्देश्य पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न असाधारण परिस्थितियों से प्रभावित पात्र रियल एस्टेट परियोजनाओं को राहत देना है। साथ ही, खरीदारों और प्रवर्तकों के बीच पहले से तय संविदात्मक अधिकारों को भी सुरक्षित रखा गया है। ये निर्देश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।
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