रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय में एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय इंडो-ताइवान कार्यशाला सम्पन्न

बरेली,16मई। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली में कल “Global Perspective on Education, Culture and Innovation” विषय पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय इंडो-ताइवान कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मल्टीलिंगुअल स्टडीज तथा डायरेक्टरेट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस के संयुक्त तत्वावधान में, एजुकेशन सेंटर, ताइपे इकोनॉमिक एंड कल्चरल सेंटर इन इंडिया (TECC) के सहयोग से आयोजित की गई।

कार्यशाला विश्वविद्यालय परिसर स्थित आरआईएफ भवन के कॉन्फ्रेंस हॉल में संपन्न हुई। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा, संस्कृति, नवाचार, मंदारिन भाषा, ताइवान की शिक्षा व्यवस्था तथा अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक अवसरों से परिचित कराना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ, तत्पश्चात विद्यार्थियों द्वारा स्वागत गीत और मंदारिन भाषा में अपना परिचय प्रस्तुत किया गया। विद्यार्थियों की प्रस्तुति ने विश्वविद्यालय में विदेशी भाषा शिक्षा के प्रति बढ़ते उत्साह को स्पष्ट किया।
कार्यक्रम की संयोजक एवं सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मल्टीलिंगुअल स्टडीज की समन्वयक प्रो. अनीता त्यागी ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि यह कार्यशाला विद्यार्थियों को वैश्विक शिक्षा, संस्कृति और नवाचार से जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि विदेशी भाषा ज्ञान आज संवाद, संस्कृति, रोजगार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों का सेतु बन चुका है। उन्होंने विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. के. पी. सिंह के दूरदर्शी मार्गदर्शन को इस केंद्र की सफलता का आधार बताया। केंद्र में मंदारिन के साथ-साथ फ्रेंच, जर्मन और स्पेनिश भाषाओं के डिप्लोमा कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं।
मंदारिन प्रशिक्षिका सुश्री चियाली चेन ने विद्यार्थियों को मंदारिन भाषा को संस्कृति और जीवनशैली से जोड़कर सीखने के लिए प्रेरित किया। वहीं TECC, नई दिल्ली के सहायक निदेशक श्री नीरज ने ताइवान की शिक्षा प्रणाली, छात्रवृत्तियों और उच्च शिक्षा के अवसरों की विस्तृत जानकारी दी। ताइवान एजुकेशन सेंटर, नई दिल्ली की निदेशक सुश्री जिल लाई ने कहा कि भारत-ताइवान के बीच शिक्षा और संस्कृति में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं और उन्होंने विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना की।

डायरेक्टरेट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस के निदेशक प्रो. एस. एस. बेदी ने कहा कि इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय कार्यशालाएं विश्वविद्यालय की वैश्विक पहचान को मजबूत करती हैं और विद्यार्थियों को वैश्विक एक्सपोजर, भाषा कौशल और सांस्कृतिक समझ के लिए प्रेरित करती हैं।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखा गया। उन्होंने TECC प्रतिनिधियों से ताइवान में अध्ययन, छात्रवृत्ति प्रक्रिया और भविष्य की संभावनाओं पर सवाल-जवाब किए। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन के बाद अतिथियों को विश्वविद्यालय परिसर का भ्रमण कराया गया, जिसमें पांचाल संग्रहालय, खेल परिसर, केंद्रीय पुस्तकालय, डायरेक्टरेट ऑफ रिसर्च तथा प्रशासनिक भवन शामिल रहे।
यह कार्यशाला एमजेपी रोहिलखंड विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीयकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुई। माननीय कुलपति प्रो. के. पी. सिंह के कुशल मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय निरंतर ऐसे कार्यक्रम आयोजित कर रहा है जो विद्यार्थियों को स्थानीय सीमाओं से आगे बढ़ाकर अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करते हैं।
बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट
