Sunday, September 20, 2026
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शोध का उद्देश्य ज्ञान-सृजन और समाजहित होना चाहिए,उपाधि प्राप्त करना नहीं : प्रो. अनिल कुमार राय, कुलपति रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय

बरेली,18 सितम्बर।महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय के बी.एड./एम.एड. विभाग, शिक्षा संकाय द्वारा आयोजित भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित दस दिवसीय शोध पद्धति पाठ्यक्रम का कल गुरुवार को समापन हुआ। “सामाजिक विज्ञान में शोध पद्धति एवं कौशल विकास : राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप” विषय पर आयोजित समापन समारोह विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. अनिल कुमार राय ने कहा कि शोध का उपयोग समाजहित में किया जाना चाहिए तथा शोध की यह यात्रा निरंतर जारी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शोध का उद्देश्य केवल उपाधि प्राप्त करना नहीं, बल्कि ज्ञान-सृजन करना और उस ज्ञान को समाज के विकास एवं कल्याण के लिए उपयोगी बनाना है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का भी यही उद्देश्य है कि स्वदेशी एवं भारतीय संदर्भों पर आधारित शोध को प्रोत्साहित किया जाए और उससे प्राप्त ज्ञान समाज के लिए उपयोगी सिद्ध हो।

समारोह के मुख्य अतिथि श्री शशांक भाटिया, प्रांत संघचालक–ब्रज प्रांत, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भारतीय मूल की समृद्ध शोध परंपरा को आगे बढ़ाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शोधार्थियों को जीवनभर सीखते रहना चाहिए तथा अपने ज्ञान और शोध के माध्यम से समाज को प्रकाशित एवं समृद्ध करना चाहिए। उन्होंने शोधार्थियों से भारतीय ज्ञान, मूल्यों और सामाजिक आवश्यकताओं को अपने शोध का आधार बनाने का आह्वान किया।

विशिष्ट अतिथि प्रो. ओ. पी. राय, प्राचार्य, बरेली कॉलेज, बरेली ने कहा कि शोध के विभिन्न आयामों को साकार करने वाली यह शैक्षणिक यात्रा प्रतिभागियों के भावी शैक्षणिक एवं व्यावसायिक जीवन को नई दिशा प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि इस पाठ्यक्रम का समापन शोध-यात्रा का अंत नहीं, बल्कि एक नवीन, व्यापक और अधिक सार्थक शोध-यात्रा का आरम्भ है।

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शिक्षा संकाय की संकायाध्यक्ष एवं विभागाध्यक्ष प्रो. संतोष अरोड़ा ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि इस प्रकार के पाठ्यक्रम शोधार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, शोध कौशल और शैक्षणिक प्रतिबद्धता विकसित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पाठ्यक्रम निदेशक डॉ. मीनाक्षी द्विवेदी ने दस दिवसीय पाठ्यक्रम का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि पाठ्यक्रम के दौरान शोध समस्या, शोध प्रश्न, उद्देश्य एवं परिकल्पना निर्माण, शोध अभिकल्प, साहित्य समीक्षा, प्रतिचयन, शोध उपकरण निर्माण, आँकड़ा विश्लेषण, शैक्षणिक लेखन, शोध नैतिकता, अंतर्विषयी शोध तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता-सहायित शोध उपकरणों जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों पर विशेषज्ञ व्याख्यान एवं व्यावहारिक गतिविधियाँ आयोजित की गईं। देश के प्रतिष्ठित केंद्रीय एवं राज्य विश्वविद्यालयों के अनुभवी विषय-विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। पाठ्यक्रम में चयनित सभी 30 प्रतिभागियों ने पूर्ण अनुशासन, समयपालन और सक्रिय शैक्षणिक सहभागिता के साथ भाग लिया।

समारोह के दौरान प्रतिभागियों ने पाठ्यक्रम से संबंधित अपने अनुभव एवं प्रतिक्रियाएँ साझा कीं। इसके पश्चात सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए तथा अतिथियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में पाठ्यक्रम सह-निदेशक डॉ. रामबाबू सिंह ने सभी अतिथियों, विषय-विशेषज्ञों, प्रतिभागियों, विश्वविद्यालय प्रशासन, आयोजन समिति एवं सहयोगियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

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