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300 करोड़ की संपत्तियों पर अनियमितताओं के आरोप! लखनऊ के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में बड़ा विवाद, सचिव पद से निलंबन का प्रस्ताव पारित

लखनऊ: राजधानी के तेलीबाग स्थित राम भरोसे मैकूलाल हायर सेकेंडरी स्कूल की साधारण सभा की विशेष बैठक में संस्था की संपत्तियों, वित्तीय लेनदेन और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। विद्यालय परिसर में आयोजित बैठक में संस्था के 55 सदस्यों में से 28 सदस्य शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता श्री दिवाकर साहू ने की।

बैठक में उपनिबंधक फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स, लखनऊ मंडल द्वारा 22 मई 2026 को जारी पत्र तथा धारा 24 के तहत प्रस्तुत जांच एवं ऑडिट आख्या पर विस्तार से चर्चा की गई। सभा के समक्ष रखे गए निष्कर्षों में सार्वजनिक न्यास संपत्तियों के कथित दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितताओं, भूमि उपयोग में बदलाव, निधियों के विचलन और अभिलेखीय कमियों जैसे कई गंभीर मुद्दों का उल्लेख किया गया।

300 करोड़ रुपये मूल्य की भूमि के उपयोग पर सवाल

बैठक में बताया गया कि संस्था के पास लगभग 30 से 32 एकड़ भूमि है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 300 करोड़ रुपये आंकी गई है। आरोप लगाया गया कि शिक्षा और कृषि उद्देश्यों के लिए आवंटित भूमि पर दुकानों, अस्पताल, विज्ञापन टावरों तथा अन्य व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन किया गया। साथ ही कृषि फार्म के लिए निर्धारित भूमि को 30 से 99 वर्ष तक की दीर्घकालिक लीज पर दिए जाने का भी उल्लेख किया गया।

1959 के अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन का आरोप

जांच आख्या में कहा गया कि भूमि का उपयोग केवल शैक्षिक और लोकहित के उद्देश्यों के लिए किया जाना था, लेकिन बिना सरकारी अनुमति के व्यावसायिक पट्टे दिए गए। साथ ही कई मामलों में प्रतिस्पर्धी निविदा, मूल्यांकन रिपोर्ट और शासी निकाय की स्वीकृति के अभाव की बात भी सामने रखी गई।

दूसरी संस्था बनाकर भूमि हस्तांतरण का आरोप

सभा में वर्ष 2018 में गठित “राम भरोसे मैकूलाल महाविद्यालय” नामक संस्था का भी उल्लेख किया गया। आरोप लगाया गया कि विद्यालय की कृषि फार्म भूमि का एक हिस्सा इस नई संस्था को 30 वर्ष की लीज पर दिया गया। जांच रिपोर्ट में इसे हितों के टकराव से जुड़ा मामला बताया गया।

एक करोड़ रुपये की लीज राशि में गड़बड़ी का दावा

बैठक में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार लीज समझौते के तहत एक करोड़ रुपये विद्यालय को मिलने थे, लेकिन बैंक अभिलेखों में कथित तौर पर 80 लाख रुपये दूसरी संस्था के खातों में जमा होने का उल्लेख किया गया। इसे निधियों के विचलन और वित्तीय अपारदर्शिता का गंभीर मामला बताया गया।

अप्रमाणित भुगतान और नकद निकासी पर भी सवाल

जांच आख्या में 6.36 लाख रुपये के एक भुगतान का उद्देश्य और संबंधित अभिलेख उपलब्ध न होने की बात कही गई। इसके अलावा 1.05 करोड़ रुपये से अधिक के विभिन्न भुगतानों के समर्थन में बिल, वाउचर, अनुबंध या कार्य निष्पादन प्रमाण उपलब्ध न होने का उल्लेख किया गया।

रिपोर्ट में 34.05 लाख रुपये की नकद निकासी का भी जिक्र किया गया, जिसके उपयोग संबंधी विश्वसनीय रिकॉर्ड उपलब्ध न होने की बात कही गई।

शुल्क और किराया आय के दमन की आशंका

सभा में बताया गया कि इंटर कॉलेज की शुल्क प्राप्तियों का समुचित लेखांकन नहीं मिला। कुछ वर्षों में शुल्क आय और किराया आय को शून्य दर्शाया गया, जबकि संस्था का संचालन और परिसंपत्तियों का उपयोग जारी था। रिपोर्ट में आय के दमन की संभावना व्यक्त की गई है।

दान, निर्माण और वेतन खर्च पर उठे सवाल

जांच आख्या में 70.50 लाख रुपये तक की दान राशि के स्रोत को अस्पष्ट बताया गया। वहीं 71.79 लाख रुपये के निर्माण कार्यों के लिए तकनीकी और प्रशासनिक समर्थन अभिलेख उपलब्ध न होने की बात भी कही गई। वेतन भुगतान संबंधी रिकॉर्ड भी अधूरे बताए गए।

धारा 24 की जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि जांच के दौरान नोटिसों का उत्तर नहीं दिया गया और कई अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए गए। इसे गंभीर वैधानिक अनियमितता माना गया।

सचिव और प्रबंधक पद से निलंबन का प्रस्ताव पारित

बैठक में पारित प्रस्तावों के तहत जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों को संज्ञान में लिया गया और संस्था की संपत्तियों की सुरक्षा के लिए वैधानिक कदम उठाने का निर्णय लिया गया। सभा ने जांच रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों के मद्देनजर संस्था के सचिव एवं प्रबंधक पद पर कार्यरत श्री श्रीकांत साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया।

इसके साथ ही अंतरिम व्यवस्था के रूप में श्री राम बाबू रस्तोगी को संस्था का मंत्री तथा श्री राम कुमार सिंह को विद्यालय प्रबंध समिति का प्रबंधक एवं सचिव नामित किया गया।

संपत्तियों की निगरानी के लिए समिति बनेगी

सभा ने संस्था की परिसंपत्तियों, बैंक खातों, वित्तीय अभिलेखों और आय स्रोतों की निगरानी के लिए परिसंपत्ति संरक्षण समिति गठित करने का भी निर्णय लिया। वहीं कानूनी और प्रशासनिक पत्राचार के संचालन के लिए श्री दिवाकर साहू को अधिकृत किया गया।

नई लीज, बिक्री और हस्तांतरण पर रोक का फैसला

बैठक में यह भी तय किया गया कि सक्षम न्यायालय या प्राधिकारी के किसी अन्य आदेश तक संस्था की भूमि, भवन, कृषि फार्म, बैंक खातों अथवा अन्य परिसंपत्तियों से जुड़े किसी नए हस्तांतरण, विक्रय, पट्टे या वित्तीय दायित्व को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

सभा ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप करना नहीं, बल्कि संस्था की सार्वजनिक न्यास संपत्तियों, विद्यार्थियों, शिक्षकों और अन्य हितधारकों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करना है।

 

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