उत्तर प्रदेशराज्य

एनएफएचएस-6 रिपोर्ट में यूपी की बड़ी उपलब्धि, 8 वर्षों में स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सशक्तीकरण के मानकों में उल्लेखनीय सुधार

लखनऊ: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) की ताजा रिपोर्ट ने उत्तर प्रदेश में सामाजिक और मानव विकास के क्षेत्र में हुए व्यापक बदलावों की तस्वीर सामने रखी है। वर्ष 2015-16 से 2023-24 के बीच के आंकड़ों की तुलना में स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तीकरण, परिवार नियोजन, मातृ-शिशु कल्याण और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े अधिकांश मानकों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार बीते आठ वर्षों में राज्य ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नई उपलब्धियां हासिल की हैं।

बिजली और स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ी प्रगति

रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में बिजली की पहुंच में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2015-16 में जहां 71 प्रतिशत घरों तक बिजली उपलब्ध थी, वहीं 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 95.8 प्रतिशत तक पहुंच गया। इसी तरह स्वास्थ्य बीमा या स्वास्थ्य सुरक्षा योजनाओं से जुड़े परिवारों का प्रतिशत 6.1 से बढ़कर 37.2 प्रतिशत दर्ज किया गया है। सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता में भी सुधार देखने को मिला है और ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा लगभग 97.9 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

परिवार नियोजन में सफलता, प्रजनन दर में आई कमी

जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। राज्य की कुल प्रजनन दर 2.74 से घटकर 2.2 पर पहुंच गई है। परिवार नियोजन के साधनों का उपयोग करने वाली विवाहित महिलाओं का प्रतिशत 45.5 से बढ़कर 63.8 हो गया है। वहीं परिवार नियोजन की आवश्यकता होने के बावजूद साधनों का उपयोग नहीं कर पाने वाली महिलाओं की संख्या 18 प्रतिशत से घटकर 10.8 प्रतिशत रह गई है। किशोरावस्था में गर्भधारण के मामलों में भी कमी दर्ज की गई है।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के आंकड़ों में सुधार

मातृ और शिशु स्वास्थ्य से जुड़े संकेतकों में भी सकारात्मक बदलाव सामने आया है। गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य जांच कराने वाली महिलाओं की संख्या में वृद्धि हुई है। पहली तिमाही में जांच कराने वाली महिलाओं का प्रतिशत 70.6 तक पहुंच गया है। संस्थागत प्रसव की दर भी 67.8 प्रतिशत से बढ़कर 85 प्रतिशत हो गई है, जो सुरक्षित मातृत्व की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

टीकाकरण अभियान का दिखा असर

बच्चों के पूर्ण टीकाकरण के क्षेत्र में भी राज्य ने उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। वर्ष 2015-16 में 12 से 23 माह आयु वर्ग के केवल 51.1 प्रतिशत बच्चों का पूर्ण टीकाकरण हुआ था, जबकि अब यह आंकड़ा बढ़कर 81.4 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इससे बाल स्वास्थ्य से जुड़े कई जोखिमों में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में सकारात्मक नतीजे

रिपोर्ट के अनुसार बच्चों में बौनापन की समस्या 46.2 प्रतिशत से घटकर 31.5 प्रतिशत रह गई है। वहीं कम वजन वाले बच्चों का प्रतिशत 39.5 से घटकर 34.5 प्रतिशत दर्ज किया गया है। यह बदलाव पोषण और बाल स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का संकेत माना जा रहा है।

महिला सशक्तीकरण के मोर्चे पर रिकॉर्ड सुधार

महिलाओं की शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज हुई है। 10 वर्ष या उससे अधिक स्कूली शिक्षा प्राप्त महिलाओं का प्रतिशत 32.9 से बढ़कर 42.5 प्रतिशत हो गया है। वहीं स्वयं संचालित बैंक खाते रखने वाली महिलाओं का प्रतिशत 27.7 से बढ़कर 83.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो वित्तीय सशक्तीकरण की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े संकेतकों में भी सुधार

एनएफएचएस-6 के आंकड़ों के अनुसार विवाहित महिलाओं के खिलाफ शारीरिक या यौन हिंसा के मामलों में भी कमी दर्ज की गई है। यह प्रतिशत 34.4 से घटकर 28.5 रह गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं में बढ़ती जागरूकता, शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता ने इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

 

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