सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत नई योजनाएं अधिसूचित; EPFO 3.0 से सेवाएं आसान घर बनाने, शादी और बच्चों की पढ़ाई के लिए नियमों में मिली बड़ी छूट

लखनऊ: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को अधिक सरल, तेज और डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के तहत कर्मचारी भविष्य निधि योजना-2026, कर्मचारी पेंशन योजना-2026 और कर्मचारी निक्षेप सहबद्ध बीमा योजना-2026 को 29 जून 2026 को अधिसूचित कर दिया गया है। ये नई योजनाएं अब पूर्व में लागू संबंधित योजनाओं का स्थान लेंगी।

इसके साथ ही संगठन अपने नए डिजिटल प्लेटफॉर्म ईपीएफओ 3.0 और केंद्रीकृत सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम प्रणाली 2.0.1 को भी लागू कर रहा है, जिससे करोड़ों सदस्यों और नियोक्ताओं को तेज, पारदर्शी और सरल सेवाएं मिल सकेंगी।
तकनीकी बदलाव के चलते कुछ समय के लिए प्रभावित रहेंगी सेवाएं
ईपीएफओ ने बताया कि नई व्यवस्था लागू करने के लिए तकनीकी बदलाव की प्रक्रिया चल रही है, जिसके कारण सदस्य और नियोक्ता पोर्टल की कुछ सेवाएं अस्थायी रूप से प्रभावित हैं। संगठन के अनुसार, 3 जुलाई 2026 से सेवाओं के दोबारा शुरू होने की उम्मीद है।
अधिकारियों का कहना है कि यह अस्थायी असुविधा भविष्य में बेहतर और अधिक तेज ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए जरूरी है।
अब पीएफ निकासी के लिए नहीं होगी जटिल प्रक्रिया
नई व्यवस्था के तहत पीएफ से अग्रिम निकासी की प्रक्रिया को काफी आसान बना दिया गया है। पहले जहां सदस्यों को 13 अलग-अलग श्रेणियों में से अपनी जरूरत के अनुसार विकल्प चुनना पड़ता था, वहीं अब इसे घटाकर केवल तीन प्रमुख श्रेणियों तक सीमित कर दिया गया है।
इसके अलावा अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अब अधिकांश दावों का निस्तारण बिना मानवीय हस्तक्षेप के स्वत: प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। इससे दावों के निरस्त होने की संभावना कम होगी और भुगतान सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में तेजी से पहुंच सकेगा।
घर, शादी और पढ़ाई के लिए मिली बड़ी राहत
नई व्यवस्था के तहत बीमारी, बच्चों की उच्च शिक्षा और परिवार में विवाह जैसे आवश्यक कार्यों के लिए निकासी के नियमों में बड़ी छूट दी गई है।
पहले शिक्षा और विवाह के लिए पीएफ राशि निकालने के लिए कम से कम सात वर्ष की नौकरी जरूरी थी, लेकिन अब केवल एक वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद भी सदस्य निकासी के पात्र होंगे।
इसके साथ ही बच्चों की शिक्षा के लिए अधिकतम 10 बार और विवाह के लिए अधिकतम पांच बार तक राशि निकाली जा सकेगी। पात्रता के अनुसार सदस्य अपनी पूरी उपलब्ध राशि तक का उपयोग कर सकेंगे।
घर खरीदने और बनाने के लिए भी आसान हुए नियम

घर या भूखंड खरीदने, मकान निर्माण, मरम्मत या गृह ऋण चुकाने के लिए भी अब बड़ी राहत दी गई है। पहले इसके लिए कम से कम पांच वर्ष की लगातार सेवा अनिवार्य थी, लेकिन नई व्यवस्था में इसे घटाकर केवल 12 महीने कर दिया गया है।
अब सदस्य एक वर्ष की नौकरी पूरी होने के बाद पात्रता के अनुसार अपनी पूरी उपलब्ध राशि तक निकाल सकेंगे।
आपदा और आपात स्थिति में तुरंत मिलेगी राहत
बाढ़, तूफान, लॉकडाउन या अन्य आपात परिस्थितियों में भी अब कर्मचारियों को लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में सदस्य अपनी पात्रता के अनुसार उपलब्ध राशि का पूरा हिस्सा तत्काल निकाल सकेंगे।
50 फीसदी से ज्यादा दावे होंगे स्वत: स्वीकृत
ईपीएफओ के अनुसार, नई प्रणाली लागू होने के बाद 50 प्रतिशत से अधिक दावों का निस्तारण स्वत: प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। इससे भुगतान प्रक्रिया तेज होगी और सदस्यों को दफ्तरों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
इसके अलावा फॉर्म भरने की प्रक्रिया को भी आसान बनाया गया है, जिससे छोटी तकनीकी गलतियों के कारण आवेदन निरस्त होने की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।
गिग वर्कर्स और असंगठित क्षेत्र तक पहुंचेगी सामाजिक सुरक्षा
क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त-प्रथम अश्विनी कुमार गुप्ता ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 के तहत लागू नई योजनाएं देश के प्रत्येक श्रमिक तक सामाजिक सुरक्षा पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
उन्होंने कहा कि अब ईपीएफओ की सेवाएं केवल पारंपरिक कार्यालयों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि गिग वर्कर्स और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने का प्रयास किया जा रहा है।
अधिकारी ने विश्वास जताया कि तकनीकी उन्नयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सदस्यों को पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध होंगी।
