Wednesday, August 5, 2026
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J&K में विदेशी टेरर फंडिंग का बड़ा खुलासा! मक्का में जमा हुई रकम से आतंकियों तक पहुंच रहा था पैसा, तीन आरोपियों के खिलाफ वारंट

जम्मू: जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववादी गतिविधियों के लिए विदेशी फंडिंग के कथित नेटवर्क का बड़ा खुलासा हुआ है। काउंटर इंटेलिजेंस एजेंसी कश्मीर (सीआईके) की जांच में दुबई, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और यूनाइटेड किंगडम से जुड़े तीन लोगों के नाम सामने आए हैं। एजेंसी का आरोप है कि इन लोगों ने मक्का में धन जमा कर जम्मू-कश्मीर में आतंकियों, अलगाववादियों और उनके मददगारों तक रकम पहुंचाने की साजिश रची।

तीनों आरोपियों के खिलाफ अदालत से गिरफ्तारी वारंट

सीआईके की जांच के आधार पर विशेष अदालत ने तीनों आरोपियों मोहम्मद इकबाल नैमा उर्फ अनीस, मुख्तार अहमद बाबा और शमीमा शॉल के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। वारंट श्रीनगर के एडिशनल सेशन जज एवं विशेष न्यायाधीश मंजीत राय ने जारी किए हैं। एजेंसी के अनुसार, तीनों पर मक्का में 13,600 सऊदी रियाल जमा कर आतंकियों और उनके सहयोगियों तक धन पहुंचाने का आरोप है। सूत्रों का दावा है कि यह रकम 10 लाख सऊदी रियाल तक पहुंच सकती है, जिसकी भारतीय मुद्रा में अनुमानित कीमत करीब 2.53 करोड़ रुपये है।

प्रतिबंधित संगठन से जुड़े होने का दावा

जांच एजेंसी का दावा है कि मुख्तार अहमद बाबा प्रतिबंधित संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) से जुड़ा हुआ है और पाकिस्तान से अपनी गतिविधियां संचालित कर रहा है। जांच में यह भी सामने आया कि श्रीनगर के एक परिवार के इरफान गुल, शाजिया नजीर और रियाज अहमद गोजरी जनवरी 2025 में उमरा के बहाने सऊदी अरब गए थे। आरोप है कि वहां उन्होंने मुख्तार अहमद बाबा के सहयोगियों से संपर्क कर आतंकियों और अलगाववादियों के लिए धन प्राप्त किया।

दुबई से मोबाइल नंबर साझा कर बनाई गई कड़ी

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, मूल रूप से बटमालू निवासी मोहम्मद इकबाल नैमा उर्फ अनीस दुबई की एक शिपिंग कंपनी में ऑपरेशनल मैनेजर के रूप में कार्यरत है। आरोप है कि उसने शमीमा शॉल का मोबाइल नंबर रियाज अहमद गोजरी को उपलब्ध कराया। इसके बाद गोजरी ने मक्का में हवाला के जरिए शमीमा शॉल से 13,600 सऊदी रियाल प्राप्त किए। एजेंसी के अनुसार, इस रकम में से 1,500 सऊदी रियाल इरफान गुल को दिए गए और इसका उद्देश्य भारत में आतंकी एवं राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को आर्थिक सहायता पहुंचाना था।

लश्कर-ए-ताइबा के प्रशिक्षण शिविरों से जुड़ाव का आरोप

सीआईके के अनुसार, मुख्तार अहमद बाबा वर्ष 2018 में तुर्की गया था और बाद में पाकिस्तान पहुंचा, जहां वह मुरिदके स्थित लश्कर-ए-ताइबा के प्रशिक्षण शिविरों में सक्रिय रहा। एजेंसी ने अदालत को बताया कि जुलाई 2021 में उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था। इसके अलावा सितंबर 2025 में श्रीनगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एक अन्य मामले में उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया था।

शमीमा शॉल पर अलगाववादी गतिविधियों से जुड़े होने का आरोप

जांच एजेंसी के मुताबिक, बारामूला की रहने वाली शमीमा शॉल वर्ष 1992 में पाकिस्तान चली गई थी और बाद में यूनाइटेड किंगडम में बस गई। एजेंसी ने उसे एक प्रमुख अलगाववादी नेता और ऑल पार्टीज हुर्रियत कॉन्फ्रेंस की प्रतिनिधि बताया है। जांच में दावा किया गया है कि वह भारत विरोधी गतिविधियों से जुड़ी रही है। सीआईके के अनुसार, तीनों आरोपियों को संबंधित अधिकारियों और उनके परिजनों के माध्यम से पेश होने के लिए नोटिस भेजे गए थे, लेकिन वे जांच में शामिल नहीं हुए।

इन धाराओं के तहत दर्ज है मामला

आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2) तथा गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धाराएं 13, 38, 39 और 40 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इन धाराओं में आपराधिक षड्यंत्र, गैरकानूनी गतिविधियों, आतंकी संगठन की सदस्यता, आतंकी संगठन को समर्थन और उसके लिए धन जुटाने जैसे आरोप शामिल हैं।

 

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