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ईरान में आर्थिक संकट की मार! युद्ध और महंगाई से बेहाल लोग बेच रहे बाल, लैपटॉप तक किराए पर देने की नौबत

तेहरान/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध और बढ़ते आर्थिक दबाव का असर अब आम नागरिकों की जिंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है। लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष, नकदी संकट, रिकॉर्ड महंगाई और घटती आय के कारण बड़ी संख्या में परिवार रोजमर्रा का खर्च चलाने के लिए निजी सामान बेचने या किराए पर देने को मजबूर हो रहे हैं।

आर्थिक तंगी ने बदले कमाई के तरीके

ईरानी समाचार एजेंसी आईएलएनए की रिपोर्ट के अनुसार, देश में आर्थिक हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लोग आय जुटाने के लिए असामान्य रास्ते अपना रहे हैं। कई परिवार अपने असली बाल, लैपटॉप, इस्तेमाल की हुई परफ्यूम की बोतलें, पुराने कपड़े, जूते और घरेलू सामान ऑनलाइन बेच रहे हैं। कुछ लोग इन वस्तुओं को बेचने के बजाय किराए पर देकर भी कमाई करने की कोशिश कर रहे हैं।

‘सर्वाइवल इकॉनमी’ का बढ़ता चलन

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान में एक नई तरह की ‘सर्वाइवल इकॉनमी’ विकसित हो रही है, जिसमें परिवार उन चीजों को भी पैसे में बदल रहे हैं जिन्हें पहले ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था। कई विक्रेता जल्दी नकदी जुटाने के लिए कम कीमत वाली कई वस्तुओं को एक साथ पैकेज बनाकर बेच रहे हैं, ताकि घरेलू खर्च पूरे किए जा सकें।

लैपटॉप किराए पर लेने वालों की संख्या बढ़ी

आर्थिक संकट के बीच लैपटॉप किराए पर लेने का चलन भी तेजी से बढ़ा है। कार्यालय के काम, ऑनलाइन पढ़ाई और अस्थायी जरूरतों के लिए लोग लैपटॉप किराए पर ले रहे हैं। इसके अलावा कई परिवार ऐसे घरेलू सामान भी बाजार में बेचने के लिए ला रहे हैं, जिनकी दोबारा बिक्री पर पहले बहुत कम कीमत मिलती थी।

महंगाई ने बिगाड़ा परिवारों का बजट

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आईएलएनए ने ईरान के सांख्यिकीय केंद्र के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि जुलाई के अंत में समाप्त हुए ईरानी महीने में वार्षिक मुद्रास्फीति दर 66 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि साल-दर-साल महंगाई 87.9 प्रतिशत तक पहुंच गई।

खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों और लोगों की कम होती खरीद क्षमता ने परिवारों की आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर दिया है। कई लोग गैर-जरूरी खर्चों में कटौती कर रहे हैं, इलाज और दवाओं पर खर्च सीमित कर रहे हैं और घर खरीदने की जगह किराए पर रहना बेहतर विकल्प मान रहे हैं।

युद्ध खत्म होने के संकेत नहीं

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव फिलहाल कम होता नजर नहीं आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में युद्ध समाप्त करने के प्रयासों को ईरान के लिए आखिरी मौका बताया था, जबकि तेहरान ने अमेरिका के साथ किसी भी सीधी बातचीत से इनकार किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर संघर्ष लंबा चलता है और अर्थव्यवस्था को राहत देने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते हैं तो ईरान में आम लोगों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं। मौजूदा हालात में युद्ध और आर्थिक संकट का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है।

 

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