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रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय में आयोजित “प्रो.एस.बी सिंह मेमोरियल इंटरनेशनल वैल्यू एडेड लेक्चर सीरीज “का समापन

बरेली,11मई। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय के प्रबंधन संकाय द्वारा माननीय कुलपति प्रो. के. पी. सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित “प्रो. एस. बी. सिंह मेमोरियल इंटरनेशनल वैल्यू एडेड लेक्चर सीरीज़” का कल सफलतापूर्वक समापन हुआ।

तीन दिवसीय इस व्याख्यान श्रृंखला का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को शिक्षा, कौशल, नैतिक मूल्यों तथा तकनीकी नवाचार के समन्वय से जोड़ते हुए उनके समग्र व्यक्तित्व विकास को प्रोत्साहित करना रहा।
व्याख्यान श्रृंखला के दौरान विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय वक्ताओं ने समकालीन शिक्षा, कौशल विकास, नैतिक मूल्यों एवं तकनीकी प्रगति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र में श्री अकिन्चन दास ने “एक शाश्वत सत्य जो आपकी सोच बदल सकता है” विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए जीवन मूल्यों एवं सकारात्मक सोच के महत्व को रेखांकित किया। द्वितीय सत्र में डॉ. राशि सक्सेना ने कौशल आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों के लिए व्यावहारिक एवं कौशलपरक शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। तृतीय सत्र में मिस अनुष्का ने विद्यालयी शिक्षा में कौशल ज्ञान के महत्व पर अपने विचार साझा किए। वहीं डॉ. सिम्ता ड्रोन ने मानव केंद्रित दृष्टिकोण विषय पर व्याख्यान देते हुए शिक्षा में मानवीय संवेदनाओं की भूमिका को स्पष्ट किया।
श्रृंखला के अगले चरण में डॉ. ऋचा मिश्रा ने कौशल आधारित शिक्षा, नवाचार एवं व्यावहारिक ज्ञान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा प्रणाली के अनुरूप स्वयं को विकसित करने के लिए प्रेरित किया। प्रो. सुमिता श्रीवास्तव ने मूल्य आधारित शिक्षा एवं शोध की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों को अपनाने पर बल दिया।
अंतरराष्ट्रीय सत्र में डॉ. राशि सिंह ने “ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण एवं नवाचार” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि डिजिटल युग में ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफॉर्म विद्यार्थियों के लिए वैश्विक अवसर प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण को विद्यार्थियों की रचनात्मकता एवं समस्या समाधान क्षमता विकसित करने का प्रभावी माध्यम बताया। इसी क्रम में डॉ. देवराज पनेरू ने वैश्विक शिक्षा, नेतृत्व क्षमता एवं प्रबंधन शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया।
व्याख्यान श्रृंखला के अंतिम दिवस पर एथिक्राफ्ट क्लब के समन्वयक अकिन्चन चैतन्य दास जी ने “एजुकेशन 5.0” विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने प्रेरणादायक उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि आधुनिक शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह नैतिक मूल्यों, मानवीय संवेदनाओं एवं व्यावहारिक कौशलों के समन्वय से समाज के समग्र विकास का माध्यम बनती है।
द्वितीय सत्र में जीजीएसआईपीयू के विभागाध्यक्ष डॉ. असजद उस्मानी ने “शिक्षा का भविष्य : प्रौद्योगिकी के माध्यम से मानव सशक्तिकरण” विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि प्रौद्योगिकी शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन ला रही है तथा भविष्य की शिक्षा का उद्देश्य केवल तकनीकी दक्षता प्रदान करना नहीं, बल्कि मानव क्षमताओं को सशक्त बनाना है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल शिक्षण एवं नवाचार के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
व्याख्यान श्रृंखला की आयोजक प्रो. तुलिका सक्सेना ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को ज्ञान, कौशल एवं मानवीय मूल्यों से जोड़ते हुए नई सोच एवं सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं। कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने सभी वक्ताओं के व्याख्यानों को अत्यंत प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक बताया।
कार्यक्रम का सफल संचालन प्रो. तुलिका सक्सेना, डॉ. ऋचा एवं सुश्री वैशाली द्वारा किया गया।

बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

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