बीबीएयू में आईक्यूएसी बैठक आयोजित: गुणवत्ता आधारित शिक्षा एवं अनुसंधान को मजबूत बनाने पर जोर

बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में दिनांक 9 जून को आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) की बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। इसके अतिरिक्त मुख्य तौर पर डीन ऑफ अकेडमिक अफेयर्स प्रो. एस. विक्टर बाबू, कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार सिंह, आईक्यूएसी के बाहरी सदस्य श्री अतुल कुमार दुबे एवं आईक्यूएसी निदेशक प्रो. शिल्पी वर्मा उपस्थित रहीं। बैठक में प्रस्तुत विभिन्न प्रस्तावों, विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली एवं अभिलेखों, वैश्विक रैंकिंग एवं आंकड़ों तथा शैक्षणिक और अनुसंधान वातावरण को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे प्रमुख प्रयासों पर विस्तार से चर्चा की गई।
विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने चर्चा के दौरान विश्वविद्यालय में आउटकम आधारित शिक्षा (Outcome Based Education) तथा अनुसंधान एवं विकास को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी नीतियों के निर्माण की आवश्यकता है जो पाठ्यक्रम, शैक्षणिक गतिविधियों, सामाजिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों तथा भावनात्मक बुद्धिमत्ता के विकास को प्रोत्साहित करें। इसके लिए एक स्पष्ट दृष्टि एवं लक्ष्य के साथ कार्य करने तथा विभागाध्यक्षों, संकायाध्यक्षों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं विश्वविद्यालय से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े सभी हितधारकों के सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने आगामी समय में पाठ्यक्रम के व्यापक पुनरीक्षण पर विशेष ध्यान देने की बात कही, ताकि उसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, सतत विकास लक्ष्यों एवं आउटकम आधारित शिक्षा के अनुरूप बनाया जा सके। साथ ही शैक्षणिक कार्यों के डिजिटलीकरण, सेल्फ लर्निंग मैटेरियल, ऑनलाइन एवं दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रमों को बढ़ावा देने तथा शिक्षकों द्वारा अपने विषयों के व्याख्यान रिकॉर्ड कर विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने का आह्वान किया। प्रो. मित्तल ने समाज और विश्वविद्यालय के बीच संबंधों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि विद्यार्थियों के माध्यम से अभिभावकों और समाज को जोड़ने के प्रयास किए जाएंगे, जिससे सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलेगा। शोध के संदर्भ में उन्होंने कहा कि अनुसंधान ऐसा होना चाहिए जो समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान में सहायक हो तथा जिसकी सामाजिक और आर्थिक उपयोगिता भी हो। इसके लिए शिक्षकों को विद्यार्थियों को प्रभावी मार्गदर्शन एवं मेंटरशिप प्रदान करनी चाहिए। विश्वविद्यालय कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय में स्टार्टअप संस्कृति एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से नवकल्पना सेक्शन-8 कंपनी की स्थापना की गई है, जिसके माध्यम से विद्यार्थियों को स्वरोजगार एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही पूर्व छात्रों के साथ सुदृढ़ सहभागिता से नवाचार को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ विश्वविद्यालय की सकारात्मक छवि और जनविश्वास को भी और अधिक सशक्त बनाया जा सकेगा।
आईक्यूएसी निदेशक प्रो. शिल्पी वर्मा ने बैठक के दौरान आईक्यूएसी द्वारा संचालित विभिन्न गतिविधियों एवं पहलों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विश्वविद्यालय में समर्थ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल गवर्नेंस को सुदृढ़ बनाने तथा विभिन्न सक्रिय मॉड्यूलों के प्रभावी संचालन की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने आईक्यूएसी के तत्वावधान में आयोजित विभिन्न रणनीतिक बैठकों एवं गुणवत्ता संवर्धन संबंधी गतिविधियों का उल्लेख किया। उन्होंने विश्वविद्यालय को प्राप्त विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग्स और उपलब्धियों की भी जानकारी साझा की। प्रो. वर्मा ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किए गए रोडमैप पर प्रकाश डालते हुए बताया कि संस्थान नवाचार, उद्यमिता, समग्र शिक्षा तथा सतत विकास को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है और शिक्षा, अनुसंधान और सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
बैठक में उपस्थित सदस्यों ने भी विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, अनुसंधान एवं प्रशासनिक कार्यों को और अधिक प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने हेतु अपने महत्वपूर्ण सुझाव एवं विचार प्रस्तुत किए।


