ईरान का बड़ा दांव दुनिया पर पड़ सकता है भारी! बाब-अल-मंदेब बंद हुआ तो तेल संकट गहराएगा, भारत पर भी बढ़ेगा असर
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम टूटने के बाद क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। इसी बीच ऐसी रिपोर्टें सामने आई हैं कि ईरान ने यमन के हूती विद्रोहियों को संकेत दिया है कि यदि अमेरिका उसके तेल संयंत्रों और महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे पर बड़े हमले करता है, तो लाल सागर के रणनीतिक बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को बंद करने की तैयारी की जा सकती है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यदि ऐसा होता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
होर्मुज के बाद बाब-अल-मंदेब भी बना चिंता का केंद्र

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य पहले से ही रणनीतिक रूप से संवेदनशील माना जाता है। अब बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं। यदि दोनों समुद्री मार्गों पर आवाजाही प्रभावित होती है, तो मध्य पूर्व से यूरोप, एशिया और अफ्रीका तक कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति गंभीर रूप से बाधित हो सकती है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और महंगाई पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है।
रिपोर्ट में मिसाइल और ड्रोन तैनाती का दावा
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार हूती संगठन से जुड़े सूत्रों ने दावा किया है कि बाब-अल-मंदेब क्षेत्र के आसपास मिसाइलों और ड्रोन की तैनाती की गई है और अंतिम निर्देश का इंतजार किया जा रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स स्थिति के अनुसार आगे की रणनीति तय कर सकती है। इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है व्यापक असर

जहाजों की निगरानी करने वाली संस्था केप्लर के आंकड़ों के अनुसार जून महीने में बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से प्रतिदिन लगभग 74 लाख बैरल कच्चा तेल गुजरा, जो वैश्विक उत्पादन का करीब 7 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा लगभग 42 लाख बैरल प्रतिदिन था। होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते जोखिम के चलते हाल के महीनों में इस मार्ग का महत्व और बढ़ गया है। इसी कारण सऊदी अरब ने अपनी बड़ी तेल खेपों को लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह के जरिए भेजना शुरू किया है और पाइपलाइन क्षमता बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है।
भारत पर भी पड़ सकता है असर
यदि होर्मुज और बाब-अल-मंदेब दोनों समुद्री मार्ग प्रभावित होते हैं तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। खाड़ी देशों से आने वाला तेल मुख्य रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है, जबकि रूस से आयातित यूराल्स कच्चा तेल स्वेज नहर और बाब-अल-मंदेब मार्ग से भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचता है। ऐसे में दोनों मार्गों में बाधा आने पर तेल आपूर्ति, शिपिंग लागत और पेट्रोल-डीजल सहित ऊर्जा उत्पादों की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है तथा प्रमुख समुद्री मार्गों पर आवाजाही बाधित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ भारत पर भी देखने को मिल सकता है।
