Tuesday, September 1, 2026
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उत्तराखंड के 131 बर्फीले गांवों में आज से जनगणना शुरू, 182 कर्मचारी करेंगे घर-घर गणना; जानिए कहां-कहां बने केंद्र

देहरादून। उत्तराखंड के ऊंचे और बर्फीले हिमालयी क्षेत्रों में मंगलवार से जनगणना का काम शुरू हो गया है। चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ के 131 गांवों के साथ तीन नगर निकायों को इस चरण में शामिल किया गया है। कुल 182 प्रगणक और पर्यवेक्षक घर-घर जाकर लोगों की गणना करेंगे। जनगणना की प्रक्रिया 30 सितंबर तक चलेगी।

इन जिलों के गांवों में होगी गणना

इस चरण में चमोली के 23, रुद्रप्रयाग के 4, उत्तरकाशी के 69 और पिथौरागढ़ के 35 हिमाच्छादित गांव शामिल किए गए हैं। इनके अलावा बदरीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री नगर पंचायतों में भी जनगणना होगी। उत्तरकाशी में सबसे ज्यादा 110 कर्मचारी लगाए गए हैं। चमोली में 38, पिथौरागढ़ में 22 और रुद्रप्रयाग में 12 कर्मचारी गणना का काम करेंगे।

30 सितंबर तक चलेगा अभियान

निदेशक जनगणना ईवा श्रीवास्तव के मुताबिक जनगणना को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बर्फीले और दुर्गम क्षेत्रों को देखते हुए घर-घर पहुंचकर जानकारी जुटाने की व्यवस्था की गई है। इस दौरान लोगों को साइबर ठगी से बचाने के लिए भी सतर्क किया गया है।

ओटीपी और पासवर्ड को लेकर बड़ी चेतावनी

जनगणना के दौरान किसी भी व्यक्ति से ओटीपी या पासवर्ड नहीं मांगा जाएगा। लोगों से अपील की गई है कि वे किसी के साथ अपना ओटीपी या संवेदनशील वित्तीय जानकारी साझा न करें। किसी भी संदिग्ध मांग की स्थिति में सावधानी बरतने को कहा गया है।

जाति जनगणना को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल

जनगणना की प्रश्नावली को लेकर कांग्रेस ने भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जिस तरीके से प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है, वह जनता के साथ धोखा और लीपापोती है। उन्होंने मौजूदा प्रश्नावली को रद्द कर राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों के साथ चर्चा के बाद नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करने की मांग की।

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कांग्रेस ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्रों का किया जिक्र

जयराम रमेश ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन अभी तक जवाब नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि पार्टी जातिगत जनगणना के मुद्दे को आगे भी उठाती रहेगी।

बिहार और तेलंगाना का दिया उदाहरण

कांग्रेस नेता ने बिहार और तेलंगाना में जातिगत सर्वेक्षण के दौरान अपनाई गई व्यवस्थाओं का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि इन राज्यों में तैयार की गई जातियों की सूचियों के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर भी व्यवस्था बनाई जा सकती है। रमेश ने दावा किया कि देश में करीब 4,200 जातियां हैं और अलग-अलग राज्यों तथा केंद्र के पास अपनी-अपनी सूचियां हैं।

जातिगत जनगणना पर सियासत तेज

कांग्रेस ने दावा किया कि 2023 और 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान पार्टी ने जातिगत जनगणना की मांग उठाई थी। रमेश के अनुसार, उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस की इस मांग की आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि 30 अप्रैल 2025 को केंद्र सरकार ने 2027 में जातिगत जनगणना कराने की घोषणा की, जिसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सुझाव दिए थे।

 

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