एसआरएमएस मेडिकल कालेज में दो दिवसीय कोलोप्रोक्टोलॉजी कांफ्रेंस एवं वर्कशाप का शुभारम्भ

बरेली,12 सितम्बर। सर्जरी के क्षेत्र में विशिष्ट सेवाओं के लिए बरेली के वरिष्ठ सर्जन एवं पूर्व महापौर डा.आईएस तोमर और वरिष्ठ आयुर्वेदिक शल्य चिकित्सक डा.लालता प्रसाद को एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय कोलोप्रोक्टोलॉजी कांफ्रेंस एवं ट्रेनिंग वर्कशॉप के पहले दिन लाइफ टाइम अचीवमेंट से सम्मानित किया गया। दोनों चिकित्सकों को सम्मानित करते हुए एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक एवं चेयरमैन देव मूर्ति जी ने चिकित्सकों की युवा पीढ़ी को इन दोनों से मरीजों के प्रति सेवा भाव, जुनून और नैतिक मूल्यों को सीखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मरीजों के उपचार में जितना अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी को अपनाना जरूरी है उससे ज्यादा नैतिक मूल्यों का ध्यान जरूरी बेहद आवश्यक है।

-------------------------------------------------------------------------------------------
एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज के जनरल, लेप्रोस्कोपिक एवं रोबोटिक सर्जरी विभाग की ओर से दो दिवसीय कोलोप्रोक्टोलॉजी कांफ्रेंस एवं ट्रेनिंग वर्कशाप शनिवार (12 सितंबर 2026) को आरंभ हुई। एसोसिएशन ऑफ सर्जन आफ इंडिया के बरेली चैप्टर के सहयोग से हो रही इस कोलोप्रोक्टोलॉजी कांफ्रेंस एवं ट्रेनिंग वर्कशाप के पहले दिन उद्घाटन सत्र के साथ साइंटिफिक प्रोग्राम के अंतर्गत 11 सेशन हुए। इनमें विशेषज्ञ चिकित्सकों ने विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए। दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना और संस्थान गीत के बाद आरंभ हुए उद्घाटन सत्र में देव मूर्ति जी ने डा.आईएस तोमर को बड़ा भाई बताया और उनके साथ साझा की गई घटनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि डा.तोमर को दोपहर में सोने की आदत है। ऐसे ही एक दोपहर हमने उन्हें जगाया और मेयर का चुनाव लड़ने के लिए कहा। उन्होंने बात मानी और बाद में जो हुआ आप सबको पता है। डा.तोमर दो बार महापौर बने और राजनीति के मंजे हुए खिलाड़ी साबित हुए। राजनीति के साथ इनसे मरीजों के प्रति सेवाभाव और नैतिक मूल्यों की सीख लेनी आवश्यक है।
सम्मानित होने के बाद में वरिष्ठ सर्जन एवं पूर्व महापौर डा.आईएस तोमर सम्मान के लिए एसआरएमएस ट्रस्ट का आभार जताया और धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि देव मूर्ति जी और हमने एक साथ एक दूसरे को आगे बढ़ते देखा है। अच्छे और बुरे दिनों में एक दूसरे का साथ पाया है। उनकी मेहनत और परिश्रम से ही आज एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज का देश में अपना अलग और विशिष्ठ और सर्वश्रेष्ठ स्थान है। यह बरेली के लिए सौभाग्य और हम सबके लिए गर्व की बात है। डा.तोमर ने कहा कि आज मरीजों के उपचार के लिए अत्याधुनिक उपकरण और संसाधन उपलब्ध हैं। जब हमने 1972 में एमएस किया और प्रैक्टिस शुरू की तब सुविधाएं नहीं थीं। मरीज के क्लिनिकल एसेसमेंट के लिए एक्सरे को छोड़ कर कुछ नहीं था। उसी के सहारे हम सबने उपचार शुरू किया और अब तक 65 हजार से ज्यादा सर्जरी प्रोसीजर किए। इस दौरान एक बात हमेशा ध्यान रखी। वह थी, मरीज का इलाज करते वक्त अपने नैतिक मूल्यों को थामे रखना। समय बदला। समाज बदला और नैतिक मूल्य भी बदल गए। लेकिन आज भी मानवता की सेवा में नैतिक मूल्यों का अपना अलग महत्व है। धन के बजाय इसी को ध्यान में रखते हुए मरीज का उपचार करना आज भी जरूरी है। अगर कभी पैर डगमगाए तो अंतरात्मा की आवाज सुनें और उसी की बात मानें, क्योंकि नैतिक मूल्यों से जुड़ी होने से अंतरात्मा की बात ही सही होगी। आज के युवा चिकित्सकों को प्रतिदिन अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनने के लिए दो मिनट का समय अवश्य निकालना चाहिए। यही उनके लिए मेरा संदेश है।
उद्घाटन सत्र में इंटरनेशनल सोसायटी आफ कोलोप्रोक्टोलॉजी (आईएससीपी) के पूर्व प्रेसिडेंट डा.प्रशांत रहाटे ने कोलोप्रोक्टोलॉजी कांफ्रेंस एवं वर्कशाप के लिए आयोजन समिति का आभार जताया और अपनी शुभकामनाएं दीं। आईएससीपी के सेक्रेटरी डा. नीरज गोयल ने कहा कि आईएससीपी का मुख्य एजेंडा सही जानकारी और ज्ञान को चिकित्सकों के बीच पहुंचाना है। हम लोग हर महीने देश भर के शहरों में इस तरह के कार्यक्रमों के जरिये इस काम को अंजाम दे रहे हैं। एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में आयोजित कांफ्रेंस में देश भर के विशेषज्ञ सर्जन मौजूद होने से कार्यक्रम सफल है और इसके लिए आयोजन समिति को बधाई। इंटरनेशनल सोसायटी आफ कोलोप्रोक्टोलॉजी (आईएससीपी) के एकेडेमिक कंवीनर डा.दिनेश शाह ने कहा कि दो दिवसीय यह कांफ्रेंस एक शुरुआत है। इसका मुख्य और प्राथमिक उद्देश्य सीखना और सिखाना है। सर्जरी के अत्याधुनिक प्रोसीजर्स के साथ नई टेक्नोलॉजी को जानना बेहद आवश्यक है। इसी के जरिए मरीजों का सर्वश्रेष्ठ उपचार किया जा सकता है।
आईएमए के प्रदेश अध्यक्ष डा.रवीश अग्रवाल ने एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज को उत्तर भारत का प्रीमियम मेडिकल कॉलेज बताया और कहा कि यहां सीखने और सिखाने पर फोकस दिया जाता है। ऐसे में यहां कोलोप्रोक्टोलॉजी कांफ्रेंस एवं ट्रेनिंग वर्कशाप होना और भी बड़ी बात है। उन्होंने चिकित्सकों के संगठित होने, ज्ञान को बांटने और सीखने सिखाने पर जोर दिया। कहा कि यह मरीजों के लिए उपचार के लिए जरूरी है। एसोसिएशन ऑफ सर्जन आफ इंडिया के बरेली चैप्टर के अध्यक्ष डा.कौशल कुमार ने कोलोप्रोक्टोलॉजी कांफ्रेंस एवं ट्रेनिंग वर्कशाप को सफल बताया। कहा कि वरिष्ठों से सीखने और उनके साथ विमर्श करने से जानकारी बढ़ती है। एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) डा.एमएस बुटोला ने एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में संचालित ऑक्सीजन थेरेपी, रोबोटिक सर्जरी जैसी विश्वस्तरीय सुविधाओं और विशेषताओं की जानकारी दी। इससे पहले कोलोप्रोक्टोलॉजी कांफ्रेंस एवं ट्रेनिंग वर्कशाप के चेयरमैन एवं जनरल, लेप्रोस्कोपिक एवं रोबोटिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डा.एसके सागर ने सभी का स्वागत किया और कोलोप्रोक्टोलॉजी कांफ्रेंस एवं ट्रेनिंग वर्कशाप की जानकारी दी। अंत में कोलोप्रोक्टोलॉजी कांफ्रेंस एवं ट्रेनिंग वर्कशाप के सेक्रेटरी एवं एसोसिएशन ऑफ सर्जन ऑफ इंडिया के बरेली चैप्टर के ट्रेजरार डा.अमित सिंह ने सभी का आभार जताया और धन्यवाद ज्ञापित किया। उद्घाटन सत्र का संचालन डा.शिवांगी मिधा ने किया। इस अवसर पर एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज के डायरेक्टर आदित्य मूर्ति जी, इंटरनेशनल सोसायटी आफ कोलोप्रोक्टोलॉजी (आईएससीपी) के ट्रेजरार डा.जितेन चौधरी (मुंबई), एसोसिएशन आफ सर्जन आफ इंडिया के बरेली चैप्टर के सेक्रेटरी डा.सुजॉय मुखर्जी, मेडिकल सुपरिटेंडेंट डा.आरपी सिंह, वाइस प्रिंसिपल डा.रोहित शर्मा, डिप्टी मेडिकल सुपरिटेंडेंट डा.सीएम चतुर्वेदी, डीएसडब्ल्यू डा.क्रांति कुमार, सभी विभागाध्यक्ष, फैकल्टी, डेलीगेट्स और पीजी विद्यार्थी मौजूद रहे।
बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

