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ऑपरेशन सिंदूर से पहले PM मोदी ने सेना को क्या निर्देश दिए थे? पूर्व CDS अनिल चौहान ने खोले कई राज

नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारत के पूर्व प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान ने कई अहम जानकारियां साझा की हैं। उन्होंने बताया कि मई 2025 में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में किस तरह की रणनीति पर चर्चा हुई थी। चौहान ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान के किराना हिल्स को सीधे निशाना नहीं बनाया था।

किराना हिल्स पर हमले को लेकर क्या बोले पूर्व CDS

जनरल अनिल चौहान ने कहा कि किराना हिल्स को भारतीय सेना ने लक्ष्य नहीं बनाया था। उन्होंने एयर मार्शल एके भारती के उस बयान का भी समर्थन किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत ने किराना हिल्स पर हमला नहीं किया, चाहे वहां कुछ भी मौजूद रहा हो। किराना हिल्स को लेकर यह दावा किया जाता रहा है कि वहां पाकिस्तान का परमाणु प्रतिष्ठान मौजूद है।

सरगोधा की तरफ भेजे गए थे कई ड्रोन

पूर्व CDS ने बताया कि कार्रवाई से पहले सरगोधा की दिशा में कई आत्मघाती ड्रोन भेजे गए थे। किराना हिल्स सरगोधा से करीब 10 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। इन ड्रोन का उद्देश्य सरगोधा और उसके आसपास मौजूद राडार की तलाश करना था। उन्होंने बताया कि ऐसे ड्रोन एक निश्चित समय तक हवा में रह सकते हैं। करीब दो घंटे तक कोई लक्ष्य नहीं मिलने पर उनकी उड़ान क्षमता खत्म हो सकती है और वे नीचे गिरकर किसी स्थान से टकरा सकते हैं।

तो किराना हिल्स से धुआं उठने की वजह क्या थी?

जनरल चौहान ने कहा कि संभव है कि इनमें से कोई ड्रोन उड़ान क्षमता खोने के बाद किराना हिल्स की किसी पहाड़ी से टकराया हो। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी मीडिया में उस समय किराना हिल्स से धुआं उठने वाली कुछ तस्वीरें भी दिखाई गई थीं। उनके मुताबिक, यही उन कारणों में से एक हो सकता है जिसकी वजह से किराना हिल्स पर हमले को लेकर सवाल उठे।

29 अप्रैल की बैठक में तय हुई थी बड़ी कार्रवाई

जनरल चौहान ने बताया कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद 29 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में अहम बैठक हुई थी। इसमें यह तय किया गया था कि पाकिस्तान को बड़ा सबक दिया जाना चाहिए और इसके लिए ऐसा कदम उठाया जाए जिसकी उम्मीद न की गई हो। उन्होंने कहा कि भारत सीमा पार से होने वाले आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं कर सकता और इसे खत्म करना जरूरी था।

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PM मोदी ने सेना से कहा था- अपनी टाइमिंग तय करो, असफलता की गुंजाइश न हो

पूर्व CDS के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना को कार्रवाई की स्वतंत्रता देते हुए कहा था कि समय अपने हिसाब से तय करें, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाए कि असफलता की कोई गुंजाइश न रहे। उन्होंने यह भी कहा था कि कार्रवाई के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद होने चाहिए। इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और तीनों सेनाओं के प्रमुख भी मौजूद थे।

23 से 29 अप्रैल के बीच कई दौर की बैठकें हुईं

चौहान ने बताया कि कार्रवाई की रणनीति को लेकर 23 से 29 अप्रैल के बीच कई बैठकें हुई थीं। चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी की चार से पांच बैठकें हुईं और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के साथ भी कई दौर की बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि सेना के पास कार्रवाई के कई विकल्प थे, जिन पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के साथ चर्चा की गई और फिर सरकार के सामने उन्हें रखा गया।

बहावलपुर को भी बनाया गया था लक्ष्य

पूर्व CDS ने बताया कि 29 अप्रैल की बैठक में बहावलपुर को भी संभावित लक्ष्यों की सूची में शामिल किया गया था। उन्होंने कहा कि इसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के जोर देने पर सूची में शामिल किया गया था। प्रधानमंत्री की ओर से बड़ा कदम उठाने की बात कहे जाने के बाद बहावलपुर को भी लक्ष्य बनाया गया। कार्रवाई का समय रात में रखने का फैसला किया गया, ताकि आम नागरिकों को कम से कम नुकसान पहुंचे।

2025 में नौ आतंकी ठिकानों पर हुई थी कार्रवाई

भारत ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस सैन्य अभियान के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में मौजूद नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया था। इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की बात सामने आई थी।

 

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