देवीपाटन मंडल में 52 लाख बच्चों को मिलेगी सेहत की सौगात, 10 अगस्त से शुरू होगा कृमि मुक्ति अभियान

गोंडा: देवीपाटन मंडल के बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर और गोंडा में 10 अगस्त से राष्ट्रीय कृमि मुक्ति अभियान शुरू होगा। अभियान के तहत एक से 19 वर्ष तक के करीब 52.15 लाख बच्चों और किशोर-किशोरियों को एल्बेंडाजोल की खुराक दी जाएगी। इसके लिए मंडल के 13,751 विद्यालयों और 9,771 आंगनबाड़ी केंद्रों को अभियान में शामिल किया गया है।

23,522 स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर दी जाएगी दवा
अभियान के दौरान स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को एल्बेंडाजोल की गोली खिलाई जाएगी। स्वास्थ्यकर्मी, आशा कार्यकर्ता और शिक्षक बच्चों को कृमि संक्रमण से बचाव के साथ दवा के महत्व की जानकारी देंगे। अभियान का उद्देश्य बच्चों को कृमि संक्रमण से बचाने के साथ उन्हें पोषक तत्वों का पूरा लाभ दिलाना, एनीमिया का जोखिम कम करना और स्वस्थ शारीरिक विकास में मदद करना है।
इंचार्ज अपर निदेशक (देवीपाटन मंडल) एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतलाल पटेल के अनुसार, अभियान में स्कूल जाने वाले बच्चों के साथ उन बच्चों को भी शामिल किया जाएगा जो स्कूल नहीं जाते हैं। सभी पात्र बच्चों तक दवा पहुंचाने के लिए 10,864 आशा कार्यकर्ताओं, 9,779 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है।
इस बार शत-प्रतिशत बच्चों तक पहुंचने का लक्ष्य
अधिकारियों के मुताबिक फरवरी 2026 में चलाए गए अभियान में 91 से 97 प्रतिशत तक कवरेज हासिल हुआ था। इस बार शत-प्रतिशत पात्र बच्चों को दवा देने का लक्ष्य रखा गया है। जो बच्चे 10 अगस्त को खुराक लेने से छूट जाएंगे, उन्हें 14 अगस्त को मॉप-अप दिवस पर दवा दी जाएगी।
गंदे हाथ, दूषित पानी और भोजन से फैलता है संक्रमण
मंडलीय प्रबंधक (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) राहुल पटेल के अनुसार, कृमि आंत में रहकर शरीर के पोषक तत्वों को प्रभावित करते हैं। खुले में शौच, गंदे हाथ, दूषित पानी और संक्रमित भोजन के कारण बच्चों में कृमि संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

अभियान के दौरान बच्चों को एल्बेंडाजोल की गोली चबाकर खाने की सलाह दी जाएगी। छोटे बच्चों को जरूरत पड़ने पर गोली को कुचलकर दिया जा सकता है।
किशोरियों के लिए भी अहम है कृमि मुक्ति अभियान
जिला सलाहकार (राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम) रंजीत कुमार के अनुसार, गंभीर कृमि संक्रमण की स्थिति में दस्त, पेट दर्द, उल्टी, एनीमिया, कुपोषण और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई बार संक्रमण के स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए साल में दो बार कृमि मुक्ति की खुराक देना जरूरी माना जाता है।
कृमि संक्रमण से बचाव होने पर बच्चों को भोजन से पोषक तत्वों का बेहतर लाभ मिल सकता है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता, शारीरिक विकास और मानसिक विकास में भी मदद मिलती है। किशोरियों के लिए बेहतर पोषण आगे चलकर सुरक्षित मातृत्व की नींव मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
कृमि संक्रमण से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
कृमि संक्रमण से बचाव के लिए बच्चों के नाखून साफ और छोटे रखने चाहिए। साफ पानी पीना, भोजन को ढककर रखना और फल-सब्जियों को अच्छी तरह धोकर खाना जरूरी है। खाने से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोने की आदत डालनी चाहिए।
इसके अलावा घर और आसपास के स्थानों की साफ-सफाई बनाए रखना, चप्पल या जूते पहनना और खुले में शौच से बचना भी संक्रमण की रोकथाम के लिए जरूरी है।
