Wednesday, June 24, 2026
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बड़ा मंगल बना सेवा, समरसता और पर्यावरण संरक्षण का महाअभियान! लखनऊ में 15 हजार से ज्यादा भंडारे, 3 करोड़ श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद

लखनऊ: राजधानी लखनऊ में इस वर्ष आयोजित ज्येष्ठ मंगल भंडारा महज धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और जनसहभागिता का एक अनूठा उदाहरण बनकर सामने आया। मंगलमान संस्था की ओर से विश्व संवाद केन्द्र में आयोजित प्रेसवार्ता में बताया गया कि ज्येष्ठ माह के आठों बड़े मंगलों के दौरान पूरे शहर में 15 हजार से अधिक भंडारों का आयोजन किया गया, जिसमें 3 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए प्रशान्त भाटिया ने कहा कि ‘मंगल महोत्सव 2026’ ने यह साबित किया है कि सनातन परंपराएं केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को संगठित, अनुशासित और आत्मनिर्भर बनाने का सशक्त माध्यम भी हैं। इस वर्ष भंडारों को ‘स्वच्छ और हरित भंडारा’ की अवधारणा के साथ आयोजित किया गया, जिसने उत्सव प्रबंधन का नया मॉडल प्रस्तुत किया।

150 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक प्रभाव

आयोजकों के अनुसार पूरे आयोजन का आर्थिक प्रभाव 150 करोड़ रुपये से अधिक आंका गया है। खास बात यह रही कि बिना किसी सरकारी बजटीय सहायता के समाज के सहयोग और जनभागीदारी से इस विशाल आयोजन को सफल बनाया गया। इससे हलवाई, टेंट व्यवसायी, परिवहन सेवा प्रदाता, फूल विक्रेता और दिहाड़ी मजदूरों सहित हजारों लोगों को रोजगार मिला तथा लगभग डेढ़ लाख मानव श्रम दिवसों का सृजन हुआ।

एक लाख पौधों का वितरण, प्लास्टिक मुक्त रहे सैकड़ों भंडारे

वाटर वुमन शिप्रा पाठक ने बताया कि इस बार पर्यावरण संरक्षण को विशेष प्राथमिकता दी गई। आयोजन के दौरान 8 लाख हरित दोने, 4 लाख हरित पत्तल, 1 लाख लकड़ी के चम्मच और 1 लाख पौधों का वितरण किया गया।

उन्होंने बताया कि मंगलमान शोध संस्थान के आंकड़ों के अनुसार 550 से अधिक भंडारे पूरी तरह प्लास्टिक और थर्माकोल मुक्त रहे। कई स्थानों पर बर्तन बैंक की व्यवस्था की गई, जहां स्टील के बर्तनों का उपयोग किया गया। इसके अलावा बेसहारा पशुओं के लिए भी विशेष पशु भंडारों का आयोजन किया गया।

सामाजिक समरसता की मिसाल बना बड़ा मंगल

प्रशान्त भाटिया ने कहा कि बड़े मंगल के आयोजन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ‘पंच परिवर्तन’ के पांच संकल्पों की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी। श्रद्धालुओं ने अनुशासित तरीके से कतारों में प्रसाद ग्रहण किया और कार्यक्रमों के बाद स्वच्छता अभियान भी चलाया।

उन्होंने बताया कि परिवारों की कई पीढ़ियां एक साथ सेवा कार्यों में जुटीं। वहीं जाति, वर्ग और आर्थिक स्थिति से ऊपर उठकर लोगों ने एक पंक्ति में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। झुग्गी-झोपड़ियों और जरूरतमंद बस्तियों में विशेष भंडारों का आयोजन कर समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा पहुंचाने का प्रयास किया गया।

गैस संकट के बीच अपनाए गए इको-फ्रेंडली विकल्प

आयोजकों के अनुसार ईरान-अमेरिका तनाव के चलते एलपीजी आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के बीच कई स्थानों पर बायोमास आधारित पर्यावरण अनुकूल चूल्हों का उपयोग किया गया। इससे आत्मनिर्भरता और स्थानीय संसाधनों के उपयोग का संदेश भी समाज तक पहुंचा।

शोध के लिए किया गया व्यापक सर्वेक्षण

आयोजन के सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों का अध्ययन करने के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय के मानवशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. उदय प्रताप सिंह के निर्देशन में 45 छात्र-छात्राओं की टीम ने आठ समूहों में विस्तृत सर्वेक्षण किया। यह अध्ययन भविष्य में शोध और सामाजिक विश्लेषण के लिए उपयोगी माना जा रहा है।

700 से अधिक स्वयंसेवकों ने संभाली जिम्मेदारी

इस अभियान को सफल बनाने में पंचतत्व फाउंडेशन, अखण्ड हिन्द फौज, लोक भारती, प्रकृति भारती, स्टूडेंट फॉर डेवलपमेंट, माँ जानकी सेवा संस्थान, एनएसएस और भारत स्काउट एवं गाइड सहित अनेक संगठनों के 700 से अधिक स्वयंसेवकों ने सक्रिय भूमिका निभाई।

लखनऊ नगर निगम ने स्वच्छता और कचरा प्रबंधन की विशेष व्यवस्था की, जबकि लखनऊ विकास प्राधिकरण ने विभिन्न आवासीय समितियों के माध्यम से जनजागरूकता अभियान चलाया। आयोजकों ने बताया कि नवाचार, स्वच्छता, प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले भंडारा आयोजकों को जिलाधिकारी द्वारा सम्मानित किया जाएगा।

डिजिटल मॉडल के रूप में विकसित करने की तैयारी

आयोजकों ने भविष्य में इस आयोजन को पूरी तरह डिजिटल और ‘प्लग एंड प्ले’ सुविधाओं से जोड़कर राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर एक आदर्श मॉडल के रूप में विकसित करने का संकल्प भी व्यक्त किया।

 

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