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माननीया कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल के निर्देशानुसार रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय में ‘पुस्तक पठन अभियान’ का शुभारंभ

बरेली,24 जुलाई। माननीया कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल के निर्देशों के अनुपालन में रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली के केंद्रीय पुस्तकालय द्वारा विश्वविद्यालय परिवार में अध्ययन संस्कृति को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से ‘पुस्तक पठन अभियान’ का भव्य शुभारंभ किया गया। यह अभियान प्रो. के.पी. सिंह, कुलपति, रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय के कुशल मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से प्रारंभ किया गया।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं को डिजिटल संसाधनों के साथ-साथ पुस्तकों के नियमित अध्ययन के लिए प्रेरित करना तथा विश्वविद्यालय परिसर में ज्ञान, शोध और बौद्धिक चिंतन का वातावरण विकसित करना है।

कार्यक्रम का शुभारंभ उप पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. विनीत जैन द्वारा दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ किया गया। तत्पश्चात् केंद्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. महेश सिंह ने सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। अपने स्वागत भाषण में उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का केंद्रीय पुस्तकालय केवल पुस्तकों का संग्रहालय नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और बौद्धिक विकास का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने कहा कि माननीया कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल द्वारा प्रदेश के विश्वविद्यालयों में पुस्तक पठन की संस्कृति विकसित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए यह अभियान प्रारंभ किया गया है, जिससे विद्यार्थियों में अध्ययन के प्रति रुचि बढ़े और वे पुस्तकालय के समृद्ध संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर सकें।

मुख्य वक्ता के रूप में विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. अनिल कुमार यादव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय सूचना एवं प्रौद्योगिकी का युग है। इंटरनेट के माध्यम से कुछ ही क्षणों में असीमित जानकारी प्राप्त की जा सकती है, किन्तु पुस्तकों का महत्व कभी कम नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि इंटरनेट त्वरित सूचना उपलब्ध कराता है, जबकि पुस्तकें विषय का गहन अध्ययन, तार्किक विश्लेषण, चिंतनशील दृष्टिकोण तथा व्यक्तित्व का समग्र विकास करती हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रतिदिन कुछ समय पुस्तक अध्ययन के लिए निर्धारित करने तथा पुस्तकालय की मुद्रित एवं डिजिटल दोनों प्रकार की सेवाओं का समान रूप से लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं, शोध कार्यों तथा उच्च शिक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए नियमित पुस्तक पठन अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कुलसचिव श्री महेंद्र कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि पुस्तकें मनुष्य की सच्ची मित्र, मार्गदर्शक एवं प्रेरणास्रोत होती हैं। उन्होंने कहा कि आज के समय में सोशल मीडिया एवं मोबाइल पर अत्यधिक निर्भरता के कारण युवाओं की अध्ययन प्रवृत्ति प्रभावित हो रही है। ऐसे समय में पुस्तक पठन अभियान जैसी पहल विद्यार्थियों को पुनः अध्ययन की मुख्यधारा से जोड़ने का महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने कहा कि नियमित पुस्तक अध्ययन से न केवल ज्ञान में वृद्धि होती है, बल्कि भाषा, अभिव्यक्ति, आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता एवं नेतृत्व कौशल का भी विकास होता है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रतिमाह कम से कम एक पुस्तक पढ़ने का संकल्प लेने का आग्रह किया।

डीन छात्र कल्याण श्री विनय ऋषिवाल ने अपने उद्बोधन में कहा कि पुस्तक पठन केवल परीक्षा उत्तीर्ण करने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को समृद्ध बनाने की एक सतत प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि महान वैज्ञानिकों, साहित्यकारों, दार्शनिकों एवं राष्ट्रनिर्माताओं के व्यक्तित्व निर्माण में पुस्तकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विद्यार्थियों को पाठ्य पुस्तकों के अतिरिक्त साहित्य, जीवनी, विज्ञान, इतिहास, संस्कृति एवं समसामयिक विषयों से संबंधित पुस्तकों का भी अध्ययन करना चाहिए, जिससे उनका बहुआयामी विकास हो सके।

इस अवसर पर केंद्रीय पुस्तकालय द्वारा उपलब्ध कराई जा रही विभिन्न आधुनिक सुविधाओं एवं सेवाओं की भी जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को पुस्तकालय के मुद्रित संग्रह, संदर्भ ग्रंथों, शोध पत्रिकाओं, ई-पुस्तकों, ई-जर्नल, डिजिटल लाइब्रेरी तथा अन्य ऑनलाइन अध्ययन संसाधनों के प्रभावी उपयोग के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों की पुस्तकों का अध्ययन किया तथा अपने पठन अनुभव साझा किए। कई विद्यार्थियों ने नियमित रूप से पुस्तकालय आने और प्रत्येक सप्ताह नई पुस्तक पढ़ने का संकल्प भी व्यक्त किया।

केंद्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. महेश सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय का केंद्रीय पुस्तकालय भविष्य में भी पुस्तक प्रदर्शनी, पुस्तक समीक्षा, लेखक परिचर्चा, वाचन सत्र, अध्ययन कार्यशाला एवं पुस्तक पठन प्रतियोगिता जैसे कार्यक्रमों का आयोजन करेगा, जिससे विद्यार्थियों में अध्ययन एवं शोध के प्रति निरंतर रुचि बनी रहे। उन्होंने कहा कि पुस्तकालय का उद्देश्य केवल पुस्तकें उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को आजीवन सीखने की संस्कृति से जोड़ना है।

कार्यक्रम का संचालन गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इसमें विश्वविद्यालय के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, अधिकारीगण, कर्मचारीगण, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम के अंत में उप पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. सुभाष चंद्र ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह पुस्तक पठन अभियान विश्वविद्यालय में अध्ययन, अनुसंधान एवं बौद्धिक उत्कृष्टता की नई परंपरा स्थापित करेगा तथा विद्यार्थियों को ज्ञान के प्रति आजीवन समर्पित रहने के लिए प्रेरित करेगा। बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

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