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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: ट्रस्ट का बड़ा संकेत, दानदाताओं को लौटाई जा सकती हैं भेंट की गई वस्तुएं

नई दिल्ली: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए बड़ा संकेत दिया है। ट्रस्ट ने कहा है कि जिन श्रद्धालुओं ने अपनी भेंट की गई वस्तुओं के संरक्षण या रसीद को लेकर सवाल उठाए हैं, उनके मामलों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। यदि कोई दानदाता निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी भेंट वापस लेने की इच्छा जताता है और उसका दावा उचित पाया जाता है, तो नियमों के अनुसार उस पर फैसला लिया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

हाल के दिनों में कुछ दानदाताओं ने आरोप लगाया था कि मंदिर को समर्पित उनकी बहुमूल्य वस्तुओं की न तो विधिवत रसीद दी गई और न ही वे मंदिर परिसर में दिखाई दीं। इन दावों के बाद चढ़ावे के संरक्षण और प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े हुए, जिसके बाद ट्रस्ट ने पूरे मामले पर विस्तृत सफाई दी।

सभी भेंटों को प्रदर्शित करना संभव नहीं: ट्रस्ट

ट्रस्ट के अनुसार, मंदिर के गर्भगृह और अन्य धार्मिक स्थलों की क्षमता सीमित है। ऐसे में सभी दान की गई वस्तुओं को एक साथ या स्थायी रूप से प्रदर्शित करना व्यावहारिक नहीं है। धार्मिक परंपराओं और व्यवस्थाओं के अनुसार आवश्यक वस्तुओं का समय-समय पर उपयोग किया जाता है, जबकि अन्य सामग्री को सुरक्षित स्थान पर संरक्षित रखा जाता है।

जांच के बाद ही जारी होती है रसीद

ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य धातुओं से बनी वस्तुओं की शुद्धता और वास्तविक मात्रा का परीक्षण किए बिना तत्काल रसीद जारी नहीं की जा सकती। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संबंधित अभिलेख तैयार किए जाते हैं और उसी आधार पर चढ़ावे का आधिकारिक रिकॉर्ड दर्ज किया जाता है।

बहुमूल्य भेंटों को लेकर भी दी सफाई

विवाद के दौरान जिन वस्तुओं का सबसे अधिक उल्लेख हुआ, उनमें स्वर्ण मंडित धार्मिक ग्रंथ, चांदी की सिल्लियां, चांदी की पादुका, बहुमूल्य हार और अन्य धार्मिक सामग्री शामिल हैं। ट्रस्ट का कहना है कि इन वस्तुओं के संरक्षण के लिए आवश्यक प्रक्रिया अपनाई गई है। कुछ धातु सामग्री का सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आवश्यक रूपांतरण भी किया गया।

मामला पहुंचा अदालत, जांच की उठी मांग

चढ़ावे के प्रबंधन और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर विभिन्न पक्षों ने न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया है। दायर याचिकाओं में स्वतंत्र जांच, वित्तीय ऑडिट और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई है। अब इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया की अगली कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।

श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखना प्राथमिकता

ट्रस्ट का कहना है कि उसका उद्देश्य मंदिर की व्यवस्थाओं को पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित करना और श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखना है। इसी वजह से समय-समय पर रिकॉर्ड और आवश्यक जानकारियां सार्वजनिक की जा रही हैं, ताकि किसी तरह की भ्रम की स्थिति न बने। साथ ही, भेंट वापस लेने से जुड़े दावों पर भी निर्धारित नियमों के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।

 

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