बचपन में यौन शोषण के दर्द पर छलका सोमी अली का दर्द, बोलीं- बच्चों की आवाज सुनना और उन पर भरोसा करना सबसे जरूरी
नई दिल्ली: अभिनेत्री सोमी अली ने एक हालिया साक्षात्कार में अपने बचपन से जुड़े बेहद संवेदनशील अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने दावा किया कि कम उम्र में उन्हें कई बार यौन शोषण का सामना करना पड़ा। अभिनेत्री ने कहा कि इन घटनाओं का उनके मानसिक स्वास्थ्य और व्यक्तिगत जीवन पर लंबे समय तक गहरा प्रभाव रहा। उनके इस बयान के बाद बच्चों की सुरक्षा, यौन शोषण की रोकथाम और पीड़ितों के प्रति समाज के रवैये को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।
बचपन के अनुभव किए साझा

सोमी अली ने बातचीत के दौरान बताया कि बचपन में उनके साथ कथित तौर पर कई बार अनुचित व्यवहार हुआ। उन्होंने कहा कि उस समय वह इतनी छोटी थीं कि पूरी तरह समझ भी नहीं पाती थीं कि उनके साथ क्या हो रहा है।
अभिनेत्री के अनुसार, बाद में जब उन्हें घटनाओं की गंभीरता का एहसास हुआ तो उन्होंने अपने परिवार को इसकी जानकारी देने की कोशिश की। उनका कहना है कि इन अनुभवों का मानसिक प्रभाव लंबे समय तक उनके साथ बना रहा।
परिवार और समाज की भूमिका पर दिया जोर
सोमी अली ने कहा कि जब कोई बच्चा अपने साथ हुई ऐसी घटना के बारे में बताता है, तो परिवार और समाज की प्रतिक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है।
उनका मानना है कि यदि बच्चों की बात को गंभीरता से सुना जाए और उन्हें भावनात्मक सहयोग मिले, तो मानसिक आघात को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पीड़ित को चुप रहने की सलाह देने के बजाय उसे सुरक्षा, विश्वास और न्याय दिलाने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।
खुलकर बात करने की बताई जरूरत
अभिनेत्री ने कहा कि वह पहले भी अपने अनुभवों को सार्वजनिक कर चुकी हैं क्योंकि उनका मानना है कि ऐसे संवेदनशील विषयों पर खुलकर चर्चा होना जरूरी है।
उनके अनुसार, बच्चों के साथ होने वाला यौन शोषण केवल किसी एक व्यक्ति की समस्या नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने सुरक्षित वातावरण और भरोसेमंद संवाद की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
बाल अधिकार और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार के यौन शोषण के मामलों में तुरंत कार्रवाई, संवेदनशील व्यवहार और मनोवैज्ञानिक सहायता बेहद आवश्यक होती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में पीड़ित को दोषी ठहराने या चुप रहने की सलाह देने के बजाय उसकी बात ध्यान से सुनना, उसे भावनात्मक सहारा देना और आवश्यक कानूनी तथा चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना सबसे महत्वपूर्ण कदम हैं।
बच्चों की सुरक्षा के लिए कानून और जागरूकता जरूरी
भारत में बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने के लिए कड़े कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। ऐसे मामलों में संबंधित एजेंसियों को सूचना देना, पीड़ित की पहचान गोपनीय रखना और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना कानून का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जागरूकता अभियानों के माध्यम से बच्चों को ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ जैसी बुनियादी जानकारी देने पर भी लगातार जोर दिया जाता है, ताकि वे किसी भी अनुचित व्यवहार की पहचान कर सकें और किसी भरोसेमंद व्यक्ति को इसकी जानकारी दे सकें।
सोमी अली का बयान केवल उनके व्यक्तिगत अनुभव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों की सुरक्षा, संवेदनशीलता और समय पर सहायता की आवश्यकता की ओर भी ध्यान आकर्षित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, विश्वास और त्वरित कार्रवाई ऐसे मामलों की रोकथाम और पीड़ितों के बेहतर पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
