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आईवीआरआई में आरवीसी के अधिकारियों द्वारा एक प्रेरणादायी इंटरएक्टिव सत्र का सफल आयोजन

बरेली,18 अप्रैल।भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), इज्जतनगर में प्लेसमेंट एवं काउंसलिंग सेल तथा छात्र कल्याण कार्यालय के संयुक्त तत्वावधान में पशु पोषण विभाग के समिति कक्ष में रिमाउंट एंड वेटरनरी कॉर्प्स (आरवीसी ) के अधिकारीयों द्वारा एक प्रेरणादायी इंटरैक्टिव सत्र का कल सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आरवीसी के वरिष्ठ अधिकारियों, संस्थान के प्राध्यापकों तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया। इस अवसर पर आयोजित संवादात्मक सत्र में विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी करते हुए भर्ती प्रक्रिया और आरवीसी में करियर के विभिन्न पहलुओं से संबंधित प्रश्न पूछे। यह सत्र विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी सिद्ध हुआ।
मुख्य अतिथि, ब्रिगेडियर अजय सिंह ब्रिग आरवीएस, मुख्यालय सेंट्रल कमांड ने विद्यार्थियों एवं संकाय सदस्यों को संबोधित करते हुए पशु चिकित्सा पेशे के महत्व और उसके वैश्विक प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में आना “ज्ञान के मंदिर” में प्रवेश करने के समान है, जहां से व्यक्ति के जीवन की मजबूत नींव रखी जाती है। उन्होंने संस्थान के निदेशक एवं संबंधित अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें देश के भविष्य यानी छात्रों से संवाद करने का अवसर प्राप्त हुआ, जो उनके लिए अत्यंत गौरव की बात है।
ब्रिगेडियर सिंह ने संस्थान की हालिया उपलब्धियों, विशेष रूप से रैंकिंग, ग्रेडिंग और प्लेसमेंट में हुई प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि यह सफलता संकाय सदस्यों की मेहनत और छात्रों के समर्पण का परिणाम है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए सभी को बधाई दी।
उन्होंने विद्यार्थियों को अपने पेशे पर गर्व करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वे सबसे पहले अपने पेशे पर गर्व करना सीखें। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अक्सर देखा जाता है कि लोग अपने पेशे को लेकर पूरी तरह आत्मविश्वासी नहीं होते, जो कि एक बड़ी समस्या है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे अन्य विकल्पों के बारे में सोचने के बजाय अपने चुने हुए पेशे पशु चिकित्सा को पूरी निष्ठा और गर्व के साथ अपनाएं। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा पेशा है जिसमें अपार संभावनाएं हैं और यदि इसमें प्रेम और समर्पण के साथ कार्य किया जाए तो व्यक्ति जीवन में निश्चित रूप से उत्कृष्टता प्राप्त कर सकता है।
अपने संबोधन में डॉ. एस. के. मेंदीरत्ता, संयुक्त निदेशक (शैक्षणिक) ने पशु चिकित्सा क्षेत्र में उपलब्ध विविध कैरियर संभावनाओं एवं भारतीय सेना की रेमाउंट वेटरिनरी कोर (आरवीसी) में अवसरों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जिसमें युवाओं के लिए अनेक बहुआयामी अवसर उपलब्ध हैं। डॉ. मेंदीरत्ता ने छात्रों को प्रेरित करते हुए बताया कि सेना में सेवाएं न केवल व्यक्तिगत विकास का मार्ग प्रशस्त करती हैं, बल्कि परिवार के लिए भी बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं।
डॉ. मेंदीरत्ता ने छात्रों को आरवीसी के लिए अधिकाधिक आवेदन करने हेतु प्रोत्साहित करते हुए कहा कि चयन न होने की स्थिति में भी यह अनुभव अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है और आत्मविश्वास में वृद्धि करता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों एवं मार्गदर्शन सत्रों का आयोजन नियमित रूप से किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक छात्र लाभान्वित हो सकें।
इससे पूर्व डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह, परीक्षा नियंत्रक एवं शैक्षणिक समन्वयक ने स्वागत भाषण देते हुए मुख्य अतिथि का परिचय कराया। इस अवसर पर डॉ. रूपसी तिवारी, संयुक्त निदेशक (प्रसार शिक्षा) एवं छात्र कल्याण अधिकारी (छात्राएं), आरवीसी के अधिकारियों में कर्नल डी. एस. दलाल, कर्नल जलविंदर सिंह तथा लेफ्टिनेंट कर्नल एम. के. भट्ट, डॉ. रजत गर्ग (यूजी समन्वयक), डॉ. नारायण दत्ता, डॉ. अंजू काला सहित अनेक गणमान्य अधिकारी एवं संकाय सदस्य उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अभिषेक, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रभारी, प्लेसमेंट एवं काउंसलिंग सेल तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एस. के. साहा, छात्र कल्याण अधिकारी (छात्र) द्वारा दिया गया । बरेली से अखिलेश चन्द्र सक्सेना की रिपोर्ट

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